Monday, March 23, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home Blog Page 207

भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर ताजा अपडेट आया सामने, अब ट्रायल का इंतजार

नई दिल्लीः वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल रन जल्द ही शुरू किया जा सकता है। रेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आज रेलवे की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई पहुंच जाएगी। अभी तक ये वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बीएमएल बेंगलुरू की फैसिलिटी में तैयार की जा रही थी। ट्रेन को आईसीएफ की तरफ से अलग-अलग मापदंडों पर चेक करने के लिए सबसे पहले ऑसिलेशन ट्रायल होगा।
दिसंबर में हो सकता है उद्घाटन

इसके बाद स्टेबिलिटी ट्रायल, स्पीड ट्रायल और अन्य तरीकों के टेक्निकल ट्रायल्स के बाद इसे यात्रियों के लिए चलाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लग सकता है। उम्मीद की जा रही है कि दिसंबर तक इसका कमर्शियल रन शुरू हो जा जाएगा। इसका किराया राजधानी गाड़ियों की तर्ज पर होगा।

नई वंदे भारत एक्सप्रेस स्लीपर में होंगे इतने कोच

नई वंदे भारत एक्सप्रेस स्लीपर ट्रेन में 16 कोच और 823 बर्थ होंगे और इसमें 11 3AC कोच (611 बर्थ), 4 2AC कोच (188 बर्थ), और 1 1AC कोच (24 बर्थ) होंगे। ट्रेन में यात्रियों को झटके भी नहीं लगेंगे।

ट्रेन में होगी ये सुविधाएं

वंदे भारत एक्सप्रेस स्लीपर ट्रेन के कोच में रीडिंग लैंप, चार्जिंग आउटलेट, एक स्नैक टेबल और एक मोबाइल/मैगजीन होल्डर होगा। कोच कवच टक्कर बचाव प्रणाली से लैस होंगे। सभी कोचों में स्टेनलेस स्टील कार बॉडी होगी। जीएफआरपी आंतरिक पैनल वहां होंगे। डिब्बों में अग्नि सुरक्षा अनुपालन होगा (EN 45545)। स्वचालित दरवाजे होंगे।

180 किमी तक होगी स्पीड

बता दें कि भारतीय रेलवे ने 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण का ऑर्डर दिया है। बीईएमएल द्वारा बनाई जा रही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, वंदे भारत का नया वैरिएंट है। उम्मीद है कि यह यात्री सुविधा, स्पीड और सुरक्षा के मामले में राजधानी एक्सप्रेस को पीछे छोड़ देगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल कहा था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के मूल डिजाइन को मंजूरी दे दी गई है और ट्रेन का निर्माण शुरू हो गया है। 16 डिब्बों वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के 10 रेक 160 किमी प्रति घंटे (परीक्षण के दौरान 180 किमी प्रति घंटे) की अधिकतम परिचालन गति के साथ चलेंगे।

अरविंद केजरीवाल कल खाली करेंगे CM आवास, जानें- अब कहां रहेंगे?

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल शनिवार को सीएम आवास खाली करेंगे. आप नेताओं, पार्षदों, विधायकों और सांसदों ने अरविंद केजरीवाल को अपना घर देने की पेशकश की थी.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल शनिवार को सीएम आवास खाली करेंगे. इसके बाद अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा में रहेंगे. वह ‘आप’ सांसद अशोक मित्तल के घर में रहेंगे. अशोक मित्तल का घर 5 फिरोजशाह रोड पर है.

‘आप’ प्रमुख नई दिल्ली से अपनी विधानसभा और दिल्ली चुनाव का प्रचार देखेंगे. पार्टी नेताओं, पार्षदों, विधायकों और सांसदों ने अरविंद केजरीवाल को अपना घर देने की पेशकश की थी. इस तरह एबीपी न्यूज़ की ख़बर पर एक बार फिर मुहर लगी है. एबीपी न्यूज़ ने पहले ही बताया था कि अरविंद केजरीवाल अशोक मित्तल के घर रहेंगे.

इससे पहले ‘आप’ की ओर से बताया गया था कि अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में ‘फ्लैगस्टाफ रोड’ पर स्थित दिल्ली के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास अगले एक दो दिनों में खाली कर देंगे, क्योंकि उनके लिए नई दिल्ली क्षेत्र में एक आवास तय हो गया है, जहां वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए आएंगे.

आप’ सूत्रों ने किया था ये दावा

पार्टी सूत्रों ने दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के साथ मंडी हाउस के पास फिरोज शाह रोड पर ‘आप’ के राज्यसभा सांसदों को आवंटित दो सरकारी बंगलों में से एक में रहने के लिए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि दोनों बंगले रविशंकर शुक्ला लेन स्थित ‘आप’ मुख्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं.

इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले केजरीवाल ने कहा कि वह नवरात्रि के दौरान फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर देंगे. पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल अगले एक-दो दिनों में मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर देंगे, क्योंकि उनके और उनके परिवार के लिए एक आवास तय कर लिया गया है.’’

पार्टी ने कहा कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ नयी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में रहेंगे, जिसका प्रतिनिधित्व वे दिल्ली विधानसभा में करते हैं. इससे पहले, ‘आप’ ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के रूप में केजरीवाल को आधिकारिक आवास दिए जाने की भी मांग की थी.

अरविंद केजरीवाल कल खाली करेंगे CM आवास, जानें- अब कहां रहेंगे?

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल शनिवार को सीएम आवास खाली करेंगे. आप नेताओं, पार्षदों, विधायकों और सांसदों ने अरविंद केजरीवाल को अपना घर देने की पेशकश की थी.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल शनिवार को सीएम आवास खाली करेंगे. इसके बाद अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा में रहेंगे. वह ‘आप’ सांसद अशोक मित्तल के घर में रहेंगे. अशोक मित्तल का घर 5 फिरोजशाह रोड पर है.

‘आप’ प्रमुख नई दिल्ली से अपनी विधानसभा और दिल्ली चुनाव का प्रचार देखेंगे. पार्टी नेताओं, पार्षदों, विधायकों और सांसदों ने अरविंद केजरीवाल को अपना घर देने की पेशकश की थी. इस तरह एबीपी न्यूज़ की ख़बर पर एक बार फिर मुहर लगी है. एबीपी न्यूज़ ने पहले ही बताया था कि अरविंद केजरीवाल अशोक मित्तल के घर रहेंगे.

इससे पहले ‘आप’ की ओर से बताया गया था कि अरविंद केजरीवाल सिविल लाइंस में ‘फ्लैगस्टाफ रोड’ पर स्थित दिल्ली के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास अगले एक दो दिनों में खाली कर देंगे, क्योंकि उनके लिए नई दिल्ली क्षेत्र में एक आवास तय हो गया है, जहां वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए आएंगे.

आप’ सूत्रों ने किया था ये दावा

पार्टी सूत्रों ने दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के साथ मंडी हाउस के पास फिरोज शाह रोड पर ‘आप’ के राज्यसभा सांसदों को आवंटित दो सरकारी बंगलों में से एक में रहने के लिए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि दोनों बंगले रविशंकर शुक्ला लेन स्थित ‘आप’ मुख्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर हैं.

इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले केजरीवाल ने कहा कि वह नवरात्रि के दौरान फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर देंगे. पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल अगले एक-दो दिनों में मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर देंगे, क्योंकि उनके और उनके परिवार के लिए एक आवास तय कर लिया गया है.’’

पार्टी ने कहा कि केजरीवाल अपने परिवार के साथ नयी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में रहेंगे, जिसका प्रतिनिधित्व वे दिल्ली विधानसभा में करते हैं. इससे पहले, ‘आप’ ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख के रूप में केजरीवाल को आधिकारिक आवास दिए जाने की भी मांग की थी.

बांग्लादेश ने भारत सहित 5 देशों से वापस बुलाए अपने राजदूत, संयुक्त राष्ट्र, ऑस्ट्रेलिया भी लिस्ट में शामिल

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत सहित पांच देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए हैं। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पुर्तगाल और संयुक्त राष्ट्र से बांग्लादेश के राजदूत वापस बुलाए गए हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद बांग्लादेश और भारत के संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय से जुड़े लोगों का मानना है कि प्रशासनिक प्रभाग के आदेश देश की विदेश नीति को लेकर अच्छे नहीं रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि भारत में उच्चायुक्त सहित जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, उनमें से कई राजनीतिक नियुक्तियां नहीं थीं।
भारत में उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान के अलावा जिन अन्य लोगों को वापस बुलाया गया है, उनमें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम और पुर्तगाल में बांग्लादेश के राजदूत शामिल हैं। जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, वह आने वाले महीनों में रिटायर होने वाले थे। भारत में उच्चायुक्त रहमान भी इनमें शामिल हैं।

यूनुस सरकार के फैसलों से खुश नहीं है भारत
बांग्लादेश में छात्र संगठनों के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए। इसके कारण अगस्त की शुरुआत में शेख हसीना की सरकार गिर गई और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध खराब स्थिति में हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यवाहक प्रशासन ने हसीना के पद छोड़ने के कुछ दिनों बाद ही कार्यभार संभाल लिया। वहीं, हसीना ने बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में शरण ली। ढाका में कार्यवाहक व्यवस्था ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक कराने के लिए लगातार प्रयास किए। हालांकि, यूनुस ने भारत की आलोचना की थी और शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया था। इससे भारतीय पक्ष नाखुश था और दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो पाई।

2022 में उच्चायुक्त बने थे रहमान
कैरियर राजनयिक रहमान को जुलाई 2022 में भारत में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के स्थायी प्रतिनिधि और स्विट्जरलैंड और सिंगापुर में दूत के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने विकास सहयोग को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच बेहतर संबंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बांग्लादेश ने भारत सहित 5 देशों से वापस बुलाए अपने राजदूत, संयुक्त राष्ट्र, ऑस्ट्रेलिया भी लिस्ट में शामिल

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत सहित पांच देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए हैं। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पुर्तगाल और संयुक्त राष्ट्र से बांग्लादेश के राजदूत वापस बुलाए गए हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद बांग्लादेश और भारत के संबंध कुछ खास नहीं रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय से जुड़े लोगों का मानना है कि प्रशासनिक प्रभाग के आदेश देश की विदेश नीति को लेकर अच्छे नहीं रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि भारत में उच्चायुक्त सहित जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, उनमें से कई राजनीतिक नियुक्तियां नहीं थीं।
भारत में उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान के अलावा जिन अन्य लोगों को वापस बुलाया गया है, उनमें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम और पुर्तगाल में बांग्लादेश के राजदूत शामिल हैं। जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, वह आने वाले महीनों में रिटायर होने वाले थे। भारत में उच्चायुक्त रहमान भी इनमें शामिल हैं।

यूनुस सरकार के फैसलों से खुश नहीं है भारत
बांग्लादेश में छात्र संगठनों के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए। इसके कारण अगस्त की शुरुआत में शेख हसीना की सरकार गिर गई और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंध खराब स्थिति में हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यवाहक प्रशासन ने हसीना के पद छोड़ने के कुछ दिनों बाद ही कार्यभार संभाल लिया। वहीं, हसीना ने बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में शरण ली। ढाका में कार्यवाहक व्यवस्था ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक कराने के लिए लगातार प्रयास किए। हालांकि, यूनुस ने भारत की आलोचना की थी और शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया था। इससे भारतीय पक्ष नाखुश था और दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो पाई।

2022 में उच्चायुक्त बने थे रहमान
कैरियर राजनयिक रहमान को जुलाई 2022 में भारत में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के स्थायी प्रतिनिधि और स्विट्जरलैंड और सिंगापुर में दूत के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने विकास सहयोग को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच बेहतर संबंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

महात्‍मा गांधी पर पूछा गया 25 लाख का सवाल, कोई नहीं दे पाया जवाब, क्‍या आपको पता है?

महात्‍मा गांधी के बारे में बहुत ऐसी बातें हैं, जो कम ही लोगों को पता हैं. ऐसा ही एक वाकया अमिताभ बच्‍चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (Kaun Banega Crorepati) में भी हुआ. एक कंटेस्‍टेंट से उन्‍होंने महात्‍मा गांधी के बारे में एक सवाल पूछा, जिसका वह जवाब नहीं दे पाए. अगर वह इस प्रश्‍न का सही उत्‍तर दे पाते, तो वह 25 लाख रुपये जीत सकते थे. सही जवाब नहीं दे पाने की वजह से उन्‍हें शो से ही क्‍विट करना पड़ा.

अमिताभ ने कौन बनेगा करोड़पति शो के 16वें सीजन में एक कंटेस्‍टेंट पारस मानी सिंह से महत्‍मा गांधी से जुड़ा एक सवाल पूछा था, जिसकी कीमत 25 लाख थी यानि अगर इस सवाल का वह सही जवाब दे देते, तो वह इतनी राशि जीतकर 50 लाख के सवाल पर पहुंच जाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. आइए आपको बताते हैं कि आखिर वो सवाल क्‍या था, जिसका जवाब पारस नहीं दे सके.

पारस से क्‍या पूछा गया सवाल
अमिताभ बच्‍चन ने कौन बनेगा करोड़पति में पारस मानी सिंह से पूछा कि इनमें से किस लेखक ने महात्‍मा गांधी पर किताब लिखी है 1924 में बिना गांधी जी से मिले? इसके सही आंसर के लिए ऑप्‍शन दिए गए- A-इवान बुनिन, B-जॉर्ज ओरवेल, C-थॉमस मान, D-रोमेन रोलैंड. इनमें से किसी को चुनना था, लेकिन पारस इसका सही जवाब देने में सफल नहीं हो पाए. उन्‍होंने शो से बाहर जाने का निर्णय लिया. वह 12 लाख 50 हजार रुपये के साथ शो से क्‍विट कर गए. इस सवाल का सही जवाब था- रोमेन रोलैंड. रोमेन रोलैंड ही वह शख्‍स थे, जिन्‍होंने बिना गांधीजी से मिले ही उन पर किताब लिख दी थी

मणिपुर के उखरुल में हिंसा, 3 की मौत:10 से ज्यादा घायल, जमीन विवाद में दो पक्षों में फायरिंग; चुराचांदपुर में उग्रवादी की हत्या

मणिपुर के उखरुल जिले में बुधवार को नगा समुदाय के दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई। 10 से ज्यादा घायल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163, 2023 की उप-धारा 1 के तहत इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। अगले आदेश तक लोगों के घरों से निकलने पर रोक है।

पुलिस ने बताया कि दोनों पक्ष नगा समुदाय के हैं, लेकिन हुनफुन और हंगपुंग नाम के दो अलग-अलग गांव हैं। दोनों पक्ष एक जमीन पर अपना दावा करते हैं। स्वच्छता अभियान के तहत विवादित जमीन की सफाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच हिंसा हुई। इलाके में असम राइफल्स को तैनात किया गया है।

चुराचांदपुर में उग्रवादी की गोली मारकर हत्या
दूसरी तरफ, चुराचांदपुर जिले के लीशांग गांव के पास मंगलवार को अज्ञात लोगों ने एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन के टाउन कमांडर की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान जिले के कपरंग गांव के निवासी सेखोहाओ हाओकिप के रूप में की गई।

पुलिस ने बताया कि मृतक यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (UKNA) का सदस्य था। घटना कल सुबह 12:15 बजे चुराचांदपुर में टोरबुंग बंगले से करीब 1.5 किमी दूर हुई। पुलिस ने हाओकिप के शव को चुराचांदपुर मेडिकल कॉलेज के मॉर्चुरी में रखवा दिया है।

थौबल में 48 घंटे का बंद, जनजीवन प्रभावित
इधर, मणिपुर के थौबल जिले में उग्रवादियों द्वारा दो युवकों की किडनैपिंग के विरोध में जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ने 48 घंटे का बंद बुलाया था। इससे मंगलवार, 1 अक्टूबर को सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

पुलिस ने बताया कि उग्रवादियों ने ​​​​​​ 27 सितंबर को दो स्थानीय युवकों का अपहरण कर लिया था। इसे लेकर JAC ने 1 अक्टूबर को सुबह 3 बजे से बंद का आह्वान किया है। JAC ने 30 अक्टूबर की रात तक युवाओं को रिहा नहीं किए जाने पर विरोध-प्रदर्शन और जिले में पूर्ण बंद की धमकी दी थी। सोमवार को थौबल मेला ग्राउंड में विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे (NH) भी जाम कर दिया।

दरअसल, कुकी मिलिटेंट्स ने तीन युवकों को बंदी बनाया था, उनमें से एक को छोड़ दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है की बाकी दोनों को भी छोड़ा जाए। प्रदर्शन में पीड़ितों के परिवार भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पीड़ित थोकचोम थोइथोइबा की मां बेहोश हो गईं।

जॉइंट एक्शन कमेटी के रिप्रेजेंटेटिव ने CM एन बीरेन सिंह से मुलाकात की। उनका कहना है कि राज्य सरकार को दी गई समय सीमा सोमवार दोपहर 1:30 बजे ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए वे विरोध-प्रदर्शन के लिए बाहर जा रहे हैं।

मणिपुर में हिंसा को लगभग 500 दिन हुए
कुकी-मैतेई के बीच चल रही हिंसा को लगभग 500 दिन हो गए। इस दौरान 237 मौतें हुईं, 1500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए, 60 हजार लोग घर छोड़कर रिलीफ कैंप में रह रहे हैं। करीब 11 हजार FIR दर्ज की गईं और 500 लोगों को अरेस्ट किया गया।इस दौरान महिलाओं की न्यूड परेड, गैंगरेप, जिंदा जलाने और गला काटने जैसी घटनाएं हुईं। अब भी मणिपुर दो हिस्सों में बंटा हैं। पहाड़ी जिलों में कुकी हैं और मैदानी जिलों में मैतेई। दोनों के बीच सरहदें खिचीं हैं, जिन्हें पार करने का मतलब है मौत।

स्कूल- मोबाइल इंटरनेट बंद किए गए। मणिपुर में अचानक बढ़ी हिंसक घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने 10 सितंबर को 5 दिन के लिए इंटरनेट पर बैन लगाया था। हालांकि, 12 सितंबर को ब्रॉडबेन्ड इंटरनेट से बैन हटा लिया गया था।

4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

पेड़ पर ज‍िसने भी देखा कांपने लगा… फ‍िर पहुंचा फोरेस्‍ट ड‍िपार्टमेंट, कड़ी मशक्‍कत से पकड़ में आया, हर कोई बजाने लगा ताली

नई दिल्ली. द‍िल्‍ली के चाणक्‍यपुरी में रोजाना की तरह आम लोगों की ज‍िंदगी चल रही थी, फ‍िर क‍िसी ने पेड़ पर जो देखा उसके बाद वो कांपने लगा. पेड़ पर लोगों ने कोई भूत नहीं बल्‍क‍ि एक सांप देख ल‍िया था. ये सांप को आम सांप नहीं बल्‍क‍ि कोबरा था. आख‍िर कोबरा द‍िल्‍ली में आया कैसे क‍िसको नहीं पता. क्‍योंक‍ि यह पहली बार है जब द‍िल्‍ली में कोबरा सांप देखा गया.

द‍िल्‍ली के चाणक्‍य पुरी में सांप द‍िखने के बाद वन और वन्यजीव विभाग ने मंगलवार को चाणक्यपुरी में एक पेड़ पर दिखे किंग कोबरा को बचाया. बताया जा रहा है क‍ि दिल्ली में किंग कोबरा को पहली बार द‍ेखा गया है. चूंकि यह विषैला सांप निर्माणाधीन उत्तराखंड भवन के बाहर मिला, अधिकारियों को शक है कि यह सांप उत्तराखंड से क‍िसी वाहन से द‍िल्‍ली आया होगा. यह सांप इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में वल्नरेबल प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध है.

कैसे क‍िया कोबरा का रेस्‍क्‍यू
मीड‍िया र‍िपोर्ट के अनुसार, पश्चिम वन्यजीव प्रभाग के उप रेंज अधिकारी, राजेश टंडन ने कहा क‍ि हमें जैसे ही सांप दिखने की सूचना मिली, हम तुरंत मौके पर पहुंचे. लगभग 10 फीट लंबा किंग कोबरा एक पेड़ पर चढ़ा हुआ था. वन विभाग ने दिल्ली फायर सर्विसेज से दो फायर टेंडर बुलाए. वन्यजीव टीम ने फायर टेंडर की हाइड्रोलिक सीढ़ी का यूज करके पेड़ पर कोबरा तक पहुंचे, जहां सांप छ‍िपा हुआ था. कोबरा को हुक का उपयोग करके टीम ने सफलतापूर्वक बचा लिया. टंडन ने कहा क‍ि यह एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान था.

पहली बार द‍िल्‍ली में द‍िखा कोबरा
बचाव अभियान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सांप को सुरक्षित निकालने के बाद भीड़ तालियां बजाते हुए दिख रहे हैं. इलाके के कई निवासी अपनी बालकनी से इस बचाव को देख रहे थे. किंग कोबरा को फिलहाल वन विभाग के एक बचाव केंद्र में रखा गया है. टंडन ने कहा क‍ि यह दिल्ली में किंग कोबरा को पहली बार देखा गया है. माना जा रहा है कि यह सांप उत्तराखंड से किसी वाहन में चढ़कर दिल्ली पहुंचा होगा. उन्होंने यह भी बताया कि सांप को उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा, क्योंकि दिल्ली उसका प्राकृतिक आवास नहीं है.

सीएम मोहन यादव ने दी 250 करोड़ रुपये की सौगात, बोले- स्वच्छताकर्मी किसी सिपाही से कम नहीं

भोपाल. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 अक्टूबर को 250 करोड़ रुपये की लागत की 19 परियोजनाओं का भूमि पूजन किया. उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन और अमृत योजना के तहत सिंगल क्लिक से भोपाल नगर निगम के लिए तीन स्थानों पर नए वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन, दो स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय और 125 सीएनजी रोड टू डोर वाहनों को हरी झंडी दिखाई. इस मौके पर उन्होंने उज्जैन के सफाई मित्रों के खाते में सिंगल क्लिक से प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर की. उन्होंने प्रदेश के 2115 सफाई मित्रों को 3-3 हजार की 63 लाख 45 हजार की रकम ट्रांसफर की. बता दें, उज्जैन को स्वच्छता में थ्री स्टार मिले थे.

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री दोनों की ही जयंती है. पहले भी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जाती थी. 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान मनाया. जब हम अपने घरों में सो रहे होते हैं, उससे पहले ही स्वच्छताकर्मी काम पर निकल जाते हैं. जैसे सिपाही देश के लिए अपना बलिदान देता है, वैसे ही स्वच्छताकर्मी अपने शहर को साफ रखने के लिए काम करता है. स्वच्छताकर्मियों के इस बड़े काम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा. महात्मा गांधी ने स्वच्छता को महत्व दिया था. 19 सितंबर को उज्जैन में देश की राष्ट्रपति के साथ हमने स्वच्छताकर्मियों को सम्मानित किया था.

मिलकर सबसा विकास करें- सीएम यादव
सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गांधी जयंती के अवसर पर आज देश भर की पंचायतों में सबकी योजना सबका विकास अभियान शुरू किया जा रहा है. यह योजना गांव में समावेशी विकास का एक मॉडल बनेगी. आइए, हम सभी इस अभियान में सक्रिय सहभागिता कर सबका साथ- सबका विकास और सबके विश्वास के मंत्र को साकार करें. बता दें, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली से कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े. उन्होंने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘अमृत’ योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के लिए 435 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भूमिपूजन-लोकार्पण किया. इसके साथ ही उन्होंने ग्वालियर की आदर्श गौशाला के 100 टन क्षमता वाले बायो सीएनजी प्लांट का उद्‌घाटन किया

इस बार शारदीय नवरात्र पर बरसेगी माता की कृपा, बन रहा खास संयोग, 9 दिन व्रत रखने वाले जान लें कब करना है पारण

प्रयागराज. शारदीय नवरात्र की गुरुवार तीन अक्टूबर से शुरूआत होने जा रही है. ग्रहों और नक्षत्रों के खास संयोग के चलते इस बार की नवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है. धर्म और ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार की शारदीय नवरात्रि पर देवी मां अपने भक्तों पर अमृत वर्षा करने जा रही हैं. इस बार चतुर्थी तिथि की बढ़ोतरी हो रही है, जबकि नवमी तिथि की हानि होगी. इसके बावजूद नवरात्रि पूरे नौ दिन की ही रहेगी. नवरात्रि पर व्रत रखने वाले श्रद्धालुओ के व्रत का पारण इस बार विजयादशमी के दिन होगा.

ज्योतिषाचार्य और वास्तु शास्त्री आचार्य अविनाश राय के मुताबिक इस बार नवरात्रि का प्रारंभ हस्त नक्षत्र में हो रहा है. प्रतिपदा यानि पहले दिन ही सुबह के वक्त से लेकर दोपहर 3.18 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा. कलश स्थापना के लिए यह बेहद शुभ मुहूर्त है. इस अवधि में कलश स्थापना करना बेहद फलदाई होगा. उनके मुताबिक इस बार की शारदीय नवरात्रि पर बृहस्पति-सूर्य और शनि का खास संयोग बन रहा है. इस तरह का खास सहयोग करने पर प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होता है. इस बार बृहस्पति की स्थिति देवी मां की आराधना करने वाले भक्तों पर अमृत वर्षा करेगी. लोगों को हर तरह और हर तरफ से लाभ होगा.

दशहरे के दिन होगा पारण
आचार्य अविनाश राय के मुताबिक इस बार चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी होने से लोगों पर भगवान गणेश की भी कृपा बरसेगी. चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं को देवी मां की आराधना के साथ ही प्रथम पूज्य भगवान गणेश की भी पूजा अर्चना करनी चाहिए. उनके मुताबिक इस बार अष्टमी और नवमी दोनों एक ही दिन पड़ रही है. हालांकि, अष्टमी का व्रत शुक्रवार के दिन रहना होगा. इसी दिन महानिशा पूजा भी होगी. महानिशा पूजा का मुहूर्त सिर्फ कुछ अवधि के लिए ही है. इस मौके पर पूजा अर्चना करने वालों को मनचाहे फल की प्राप्ति होगी. अष्टमी के दिन ही नवमी की भी पूजा होगी, लेकिन व्रत का पारण विजयदशमी की सुबह होगा.

इस बार की नवरात्री बेहद खास
आचार्य अविनाश राय का कहना है कि इस बार की नवरात्रि इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि देवी मां इस बार डोला और नौका पर सवार होकर आएंगी. उनके मुताबिक बच्चों-बूढ़ों और बीमार लोगों को छोड़कर सभी को नवरात्रि में पूरे नौ दिनों का व्रत रखना चाहिए. इस अवधि में नियम और संयम के साथ रहना चाहिए.