Tuesday, March 24, 2026
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कांग्रेस का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, कहा- वेबसाइट डाटा धीरे अपडेट किया, हमारे कार्यकर्ता परेशान हुए

हरियाणा विधानसभा चुनाव के रुझानों में शुरुआत में कांग्रेस आगे थी, लेकिन बाद में बीजेपी ने बढ़त बनाई और अब राज्य में बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। इस बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के रुझान में पिछड़ने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने जानबूझकर डाटा धीरे अपडेट किया। इससे उनके कार्यकर्ताओं को परेशानी हुई। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि माइंडगेम खेला जा रहा है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मतगणना केंद्रों में डटे रहना चाहिए। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) ने कहा “निराश होने की कोई जरूरत नहीं है…खेल खत्म नहीं हुआ है। दिमागी खेल खेले जा रहे हैं। हम पीछे नहीं हटेंगे, निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। हमें जनादेश मिलने वाला है। कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी ने कहा “हम अगले 5-7 मिनट में एक ज्ञापन दाखिल करने जा रहे हैं। हम शिकायत दर्ज करा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग हमारे सवालों का जवाब देगा। 10-11 राउंड के नतीजे पहले ही आ चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सिर्फ 4-5 राउंड के नतीजे ही अपडेट किए गए हैं। यह प्रशासन पर दबाव बनाने की एक चाल है।”

शुरुआती रुझान में कांग्रेस को मिली थीं 70 सीटें
शुरुआती रुझान में कांग्रेस को 70 से ज्यादा सीटें मिलती दिखाई दे रही थीं। राज्य में कुल 90 सीटें हैं। इनमें से 70 में बढ़त बनाने के बाद कांग्रेस अपनी जीत तय मान चुकी थी। हालांकि, थोड़ी देर में आंकड़े बदले और बहुमत कांग्रेस की बजाय बीजेपी को मिल गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए हैं। हरियाणा में बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 46 है।

बीजेपी ने दिया जवाब
कांग्रेस नेताओं की शिकायत के बाद बीजेपी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस का यह बयान साबित करता है कि उन्होंने हार मान ली है। बीजेपी ने जीत का दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हार स्वीकार करते हुए सुरक्षा के उपाय शुरू कर दिए हैं और चुनाव आयोग को दोष देना शुरू कर दिया है।

मालामाल होने का टाइम, आग की तरह फैली खजाने की खबर, क्या सच में जमीन उगल रही है सोने की सिक्के

बुरहानपुर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से अजब गजब मामला सामने आया है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर असीरगढ़ गांव में एक खेत में मुगलकालीन सोने के सिक्के मिलने का मामला सामने आया है. हालांकि यह अफवाह है या हकीकत, इसकी पुरातत्व विभाग जांच कर रहा है. लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक यह सिर्फ अफवाह है. यह अफवाह अब जिलें में आग की तरह फैल रही है. सोशल मीडिया पर भी सोने के सिक्के मिलने की खूब चर्चा है. मुगलकालीन सोने के सिक्के का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. फिलहाल इन सिक्कों को इतिहासकारों ने नकली और फेक बताया है.

मालूम हो कि नेशनल हाइवे में खुदाई का काम चल रहा है. सड़क निर्माण विभाग ने खेतों में खुदाई की है. इसी दौरान सोने के सिक्के मिलने की अफवाह फैल गई है. हालांकि इस मामले में कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इतिहासकार कमरुद्दीन फलक ने इसे केवल एक अफवाह बताकर असली और नकली सिक्के में अंतर साफ-साफ बताया है.

इतिहासकार कमरुद्दीन फलक का कहना है कि असीरगढ़ गांव में ऊंची पहाड़ी पर असीरगढ़ का मुगलकालीन किला है. जब सन 1601 इस्वी में शासक अकबर ने असीरगढ़ किले को घेरा था तब स्थानीय लोगों ने इनसे बचने के लिए सोने के सिक्के जमीन में गाड़ दिए थे. अलाउद्दीन खिलजी के समय भी लोगों ने सोने के सिक्के गाड़े थे. इलाके में सोने के सिक्के मिलना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है. कई बार मुगलकालीन सिक्के मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन वर्तमान में जो सिक्के मिले है वह सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है. किसी ने देखे नहीं है.

उन्होंने असली और नकली सिक्के में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि नकली सिक्का तुगलक डायनेस्टी का है जिस पर उर्दू भाषा में ताजुलमुल्क फिरोज लिखा है. इसमें जर्ब टकसाल नहीं लिखा है. हर अधिकृत सिक्के पर टकसाल होती है जो वायरल सिक्कों पर नहीं है क्योंकि ये नकली है. इतिहासकार कमरुद्दीन फलक ने इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से मांग की है. हालांकि इस मामले की जांच में पुरातत्व विभाग की टीम जुट गई है. जांच पड़ताल की जा रही है कि आखिर इस मामले में कितनी सच्चाई है. हकीकत है या अफवाह इसकी जांच की जा रही है.

बदलाव की चाहत या सत्ता विरोधी लहर, समझिए हरियाणा चुनाव के नतीजों की इतनी अहमियत क्यों?

हरियाणा में विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकते हैं। कांग्रेस और बीजेपी की टक्कर के बीच जाट समुदाय की भूमिका अहम होगी। दलित वोट भी निर्णायक साबित होंगे। इससे हरियाणा की सत्ता में नया मोड़ आ सकता है। कांग्रेस के तीन नेताओं ने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश की है।

नई दिल्ली: हरियाणा में मंगलवार को आने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे बेहद अहम हैं। इन नतीजों से यह पता चलेगा कि कांग्रेस बीजेपी से एक और राज्य छीनने में कामयाब होती है या नहीं। साथ ही, इन नतीजों का असर महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावों पर भी पड़ेगा, जहां जल्द ही चुनाव होने की उम्मीद है। चुनावी सर्वे और जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। अगर कांग्रेस हरियाणा में जीत हासिल करती है तो यह हिंदी पट्टी में विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, की मजबूती को दर्शाएगा। पिछले एक दशक से हिंदी पट्टी बीजेपी का गढ़ रहा है।

हरियाणा में बदलाव की लहर
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस में दिए गए लेख में कहा, हरियाणा में इस बार बदलाव की चाहत साफ दिखाई दे रही है। यहां तक कि बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले अहीरवाल और जीटी रोड क्षेत्रों में भी कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। बदलाव की इस चाहत को लोग अपनी बातचीत में भी जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने गुड़गांव जिले के बादशाहपुर में एक ढाबे पर मिले एक ड्राइवर का उदाहरण दिया, जिसने कहा, ‘मार्केटिंग में आप हमेशा कुछ नया ढूंढते रहते हैं। लोग पुराने मैसेज से ऊब गए हैं… यह ऐसा है जैसे किसी फिल्म को छठी बार देखा जाए।’

क्या कह रहे आंतरिक सर्वे?
राजनीतिक दलों के आंतरिक सर्वे भी यही बता रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के एक आंतरिक सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि कांग्रेस को 60, बीजेपी को 20 और क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को 10 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, मनोहर लाल खट्टर की अलोकप्रियता और नए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कुछ खास कर न पाना कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

बीजेपी के खिलाफ जाट वोट!
इस बार हरियाणा में जाट समुदाय, जिसकी आबादी लगभग 25% है, कांग्रेस के साथ जाता दिखाई दे रहा है। पिछले चुनावों में जाट वोट कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच बंट गया था। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बाद से ही हरियाणा में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया था। इस आंदोलन में जाट समुदाय ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। जाट समुदाय 2014 में पंजाब के एक खत्री नेता मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाए जाने से नाखुश था। पिछले साल बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह पर लगे यौन शोषण के आरोपों के खिलाफ पहलवानों का विरोध प्रदर्शन भी जाट समुदाय की नाराजगी का एक बड़ा कारण बना। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और अन्य महिला पहलवानों की लड़ाई सिर्फ न्याय की ही नहीं बल्कि जाट सम्मान की भी लड़ाई बन गई।

विनेश फोगाट का कितना प्रभाव?
कांग्रेस के टिकट पर जुलाना से चुनाव लड़ रहीं विनेश फोगाट न सिर्फ राज्य और देश की युवतियों बल्कि पुरुष प्रधान जाट समुदाय के लिए भी एक नई प्रेरणा बनकर उभरी हैं। जब वह पुरुषों की एक सभा को संबोधित कर रहीं थीं और सब उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे थे तो यह हरियाणा के समाज में आ रहे एक बड़े बदलाव को दर्शाता है। साफ है कि जाट समुदाय का गुस्सा (“जाट हर चीज दांत की चोट पर कहता है”) कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

क्षेत्रीय दलों का प्रभाव हुआ कम
चुनाव प्रचार के दौरान यह भी देखने को मिला कि इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) और जननायक जनता पार्टी (JJP) जैसे क्षेत्रीय दलों का प्रभाव कम हुआ है। अब देखना यह है कि क्या इन दलों के कमजोर होने से कांग्रेस को फायदा होगा या फिर कांग्रेस के पुनरुत्थान के कारण ये दल कमजोर हुए हैं? चुनाव परिणाम इस सवाल का जवाब दे पाएंगे। वहीं दूसरी तरफ, 2014 और 2019 में बीजेपी को सत्ता दिलाने वाला गैर-जाट वोट बैंक इस बार उतना मजबूत नजर नहीं आ रहा है।

जाट बनाम गैर-जाट का मुद्दा
हरियाणा की राजनीति में जाट बनाम गैर-जाट का मुद्दा हमेशा से रहा है। लेकिन इस बार चुनावी लड़ाई सत्ता विरोधी लहर पर केंद्रित दिखाई दे रही है। गैर-जाट समुदाय के लोग भी बदलाव की बात कर रहे हैं। दलित समुदाय इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। हालांकि हरियाणा की राजनीति पर जाट समुदाय का दबदबा रहा है, लेकिन लोकसभा चुनावों में दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ गया था। इस कारण कांग्रेस 10 में से 5 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही थी।

सभी राजनीतिक दल दलित वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि जाट प्रधान क्षेत्रीय दल भी दलित दलों के साथ गठबंधन कर चुके हैं। अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो जाट-दलित तनाव उसके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

दलित वोट निर्णायक साबित होगा
गुड़गांव जिले में स्थित सोहना विधानसभा क्षेत्र के एक दलित बस्ती में कांग्रेस को वोट देने जा रहे एक समूह ने पार्टी की सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत की। सैलजा दलित समुदाय से आती हैं और महिला होने के कारण उन्हें फायदा मिल सकता है। ये लोग पहले से ही यह सोचकर चल रहे थे कि सरकार कौन चलाएगा और उनका मानना था कि अगर सैलजा “घर पर ही बैठी रहतीं” जैसा कि उन्होंने लगभग दो हफ्ते तक किया, “तो बीजेपी जीत जाती”। उन्हें डर है कि अगर भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बनते हैं तो “जाटशाही” वापस आ जाएगी।

तीन नेताओं ने सीएम पद की दावेदारी पेश की
हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ ही सैलजा ने भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश की है। हालांकि तीनों नेताओं का कहना है कि आलाकमान ही इस बारे में अंतिम फैसला लेगा। लेकिन हरि नगर के दलित मतदाताओं समेत कई लोगों को लगता है कि आलाकमान पहले ही अपना मन बना चुका है। राज्य इकाई पर मजबूत पकड़ रखने वाले हुड्डा ने टिकट बंटवारे में अपनी चलवाई।

यहां तक कि अगर हुड्डा फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं, तो भी वह 2005 से 2014 तक अपने 10 साल के कार्यकाल की तरह इस बार पूरी तरह से अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इस बार दिल्ली में नरेंद्र मोदी की सरकार है और राहुल गांधी का कद भी बढ़ा है। हुड्डा ने सभी ’36 बिरादरियों’ को साथ लेकर चलने और समावेशी सरकार देने का वादा किया है। एक समय तो उन्होंने चार उपमुख्यमंत्री बनाने की बात भी कही थी।

हरि नगर के दलितों ने कांग्रेस की इस समस्या का एक हल सुझाया है। अगर हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो सत्ता में भागीदारी का एक ऐसा फॉर्मूला बनाया जाए जो लागू भी हो सके और जिससे हुड्डा सैलजा की भी सुने और उनकी (सैलजा) भी चले।

मुल्तान टेस्ट में शान मसूद का शतक:शफीक के साथ 200 प्लस रन की पार्टनरशिप की; टी ब्रेक तक पाकिस्तान- 233/1

पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मुल्तान में आज से शुरू हुआ। पाकिस्तान टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी कर रही है। पाकिस्तानी के कप्तान शान मसूद ने अपना शतक पूरा कर लिया है। उन्होंने अपना शतक 102 गेंदों पर पूरा किया। वहीं टी ब्रेक तक पाकिस्तान ने एक विकेट के नुकसान पर 233 रन बना लिए हैं। ओपनर सैम अयूब 4 बना कर आउट हो गए हैं। अब्दुल्लाह शफिक और शान मसूद क्रीज पर हैं।

8 रन के स्कोर पर पाकिस्तान को लगा पहला झटका पाकिस्तान को 8 रन के स्कोर पर पहला झटका लगा। ओपनर सैम अयूब को गस एटकिंसन ने जेमी ल्यूक स्मिथ के हाथों कैच करा कर पवेलियन भेजा। उसके बाद इंग्लिश बल्लेबाजों को दूसरे विकेट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

शफिक और मसूद के बीच हो चुका है 200 से ज्यादा रनों की साझेदारी वहीं तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए शान मसूद ने ओपनर अब्दुल्लाह शफिक के साथ पाकिस्तान की पहली पारी को संभालते हुए स्कोर 230 रन के पार भी पहुंचा दिया है। अब्दुल्लाह शफिक और शान मसूद के बीच 200 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप भी हो चुकी है। दोनों अभी क्रीज पर हैं। मसूद ने 43 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। जबकि 102 गेंदों पर शतक बनाए। यह उनके करियर का सबसे तेज शतक है।

वहीं लंच टाइम तक पाकिस्तान का स्कोर 25 ओवर के खेल होने के बाद 1 विकेट के नुकसान पर 122 रन था। अब्दुल्लाह शफीक ने भी 77 गेंदों पर अपना 50 रन पूरा कर चुके हैं।

दीपा कर्माकर ने लिया रिटायरमेंट, सिर्फ 0.15 पॉइंट से चूक गई थीं ओलंपिक मेडल, जिदंगीभर रहेगी कसक

भारत की दिग्गज जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने सोमवार को खेल से संन्यास लेने की घोषणा की। दीपा 2016 रियो ओलंपिक में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं थी। वह ओलंपिक में शिरकत करने वाली भारत की पहली महिला जिम्नास्ट हैं।

नई दिल्ली: भारत की स्टार जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने एक हैरान करने वाला फैसला लिया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए सोमवार को अपने शानदार करियर को अलविदा कह दिया। ओलंपिक में भाग लेने वाली देश की पहली महिला जिम्नास्ट 31 वर्षीय दीपा वॉल्ट स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहीं थीं। वह ओलंपिक पदक सिर्फ 0.15 अंक से चूक गई थीं। उनका प्रदर्शन हैरान करने वाला था। उन्होंने प्रोडुनोवा करते हुए हर किसी को सरप्राइज कर दिया था।

दीपा ने अपने बयान में कहा- काफी सोच-विचार और चिंतन के बाद मैंने प्रोफेशनल जिम्नास्टिक से संन्यास लेने का फैसला किया है। यह कोई आसान फैसला नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सही समय है। जब से मैं याद कर सकती हूं जिम्नास्टिक मेरे जीवन का सबसे अहम हिस्सा रहा है। मैंने हर पल को खूब जिया है। मैं हर पल के लिए आभारी हूं।

एक मैच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बेटे के लिए सियासी पिच तैयार कर दी? मोदी स्टाइल में किया खेल

ग्वालियर में 14 साल बाद अंतरराष्ट्रीय मैच का आयोजन हुआ है। इस मैच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने बेटे महाआर्यमन सिंधिया के लिए सियासी पिच तैयार कर दी है। साथ ही ग्वालियर में उन्होंने महाआर्यमन सिंधिया को स्थापित कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि महाआर्यमन सिंधिया के लिए महाराज ने कैसे पूरी फिल्डिंग सजाई है।

ग्वालियर: 14 साल बाद ग्वालियर में अंतरराष्ट्रीय मैच का वनवास खत्म हो गया है। माधव राव सिंधिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पहला टी-20 मैच भारत औऱ बांग्लादेश के बीच खेल गया। इस मैच में भारतीय टीम को प्रचंड जीत मिली है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का मोदी स्टाइल देखने को मिला है। उनके चेहरे पर मुस्कान और जोश यह बताने के लिए काफी था कि एक मैच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कैसे अपने बेटे के लिए सियासी पिच तैयार कर दी है।

एक मैच से बदल गई सिंधिया की राजनीति

दरअसल, ग्वालियर-चंबल अंचल से राजनीति में आने के लिए कई नेता पुत्र ललायित हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में मोदी स्टाइल में खेल कर दिया है। पॉलिटिक्स बेटे की एंट्री सीधे नहीं करवाई है। उन्होंने कथित तौर पर बेटे के लिए सियासी पिच खेल के मैदान करवा रहे हैं। उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया जीडीसीए के उपाध्यक्ष हैं। इसके बाद से ग्वालियर को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कवायद शुरू की।

250 करोड़ रुपए खर्च कर स्टेडियम का निर्माण करवाया

मोदी कैबिनेट में शामिल होने के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले ग्वालियर में 250 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण करवाया। निर्धारित समय में स्टेडियम बनकर तैयार हो गया। स्टेडियम बनने के दौरान ही उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया जीडीसीए के उपाध्यक्ष बन जाते हैं।

ग्वालियर में एमपीएल करवाया

महाआर्यमन सिंधिया जीडीसीए के उपाध्यक्ष बनने के बाद ग्वालियर को अलग पहचान दिलाने के लिए काम कर रहे थे। कुछ महीने पहले उन्होंने आईपीएल की तर्ज पर एमपीएल का आयोजन किया था। इसका आयोजन माधव राव सिंधिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में हुआ। आयोजन में तत्कालीन बीसीसीआई के सचिव जय शाह और कपिल देव जैसे पूर्व क्रिकेटर भी आए। जय शाह ने स्टेडियम को देखा भी।

उनके जाने के कुछ दिनों बाद ग्वालियर में अंतरराष्ट्रीय मैच को लेकर घोषणा हो गई है। बीसीसीआई ने कहा था कि भारत और बांग्लादेश के बीच टी-20 का मैच ग्वालियर में ही होगा। यह महाआर्यमन की मेहनत की बड़ी उपलब्धि थी। 14 साल बाद ग्वालियर को अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी का मौका मिल गया।

सिंधिया का दिखा अलग अंदाज

6 अक्टूबर को भारत बांग्लादेश के बीच मैच का आयोजन हुआ। मैच के दौरान स्टेडियम में मोदी स्टाइल में ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री हुई। वह हाथ हिलाते और दर्शकों का अभिवादन करते हुए सीट तक गए हैं।

बेटे के लिए तैयार कर दी पिच

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में इस मैच से अपने बेटे के लिए सियासी पिच तैयार कर दी है। अंतरराष्ट्रीय मैच और स्टेडियम का पूरा क्रेडिट सिंधिया को ही जाता है। वह ग्वालियर-चंबल के हर कार्यक्रम में इस उपलब्धि का जिक्र करते हैं। साथ ही बताते हैं कि केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार होने की वजह से कैसे ग्वालियर में बदलाव हो रहा है। साथ ही अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच से महाआर्यमन सिंधिया को भी चंबल अंचल में नई पहचान मिल गई है।

सियासत में आएंगे महाआर्यमन सिंधिया?

वहीं, राजनीति में एंट्री को लेकर महाआर्यमन सिंधिया कभी कुछ खोलकर बोलते नहीं हैं। राजनीति की बात करें तो वह अपने पिता के क्षेत्र में ज्यादा एक्टिव रहते हैं। वहीं, ग्वालियर में सिर्फ सार्वजनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में रहते है। लेकिन क्रिकेट की वजह से उन्होंने अलग पहचान बनाई है। यह ग्वालियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसकी वजह से उनसे लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक मैच से बेटे के लिए मैदान तैयार कर दी है।

इंदौर की सड़कों पर दौड़ेगी Lamborghini Huracan Evo Spyder, कलर के लिए 32 लाख खर्च किए

इंदौर के कारोबारी तपन अग्रवाल ने लैम्बॉर्गिनी हुराकान ईवो स्पाइडर एवीडी खरीदी है। इसकी कीमत करीब चार करोड़ रुपए है। कलर कस्टमाइज्ड करवाने के लिए कारोबारी ने अलग से 32 लाख रुपए खर्च किए हैं। ऐसा कलर देश में किसी के पास नहीं है।

इंदौर: शहर के जाने-माने कारोबारी विनोद अग्रवाल के बेटे तपन अग्रवाल ने एक बार फिर से लग्जरी कार खरीदी है। इस बार उन्होंने 4 करोड़ रुपए कीमत वाली लैम्बॉर्गिनी हुराकान ईवो स्पाइडर एवीडी कार खरीदी है। इस कार की खासियत यह है कि इसका रंग कस्टमाइज्ड है और इसकी कीमत 32 लाख रुपए है। इस रंग की यह कार पूरे देश में सिर्फ एक ही है।

पहले से ही कई महंगी कारें

तपन अग्रवाल के पास पहले से ही कई महंगी कारें हैं, जिनमें 7 करोड़ रुपए की बेंटले एसयूवी भी शामिल है। उनके पास 11 करोड़ रुपए से भी ज्यादा कीमत वाली रोल्स रॉयस घोस्ट एक्सटेंडेड भी है। तपन को कारों का शौक बचपन से ही रहा है और उनके पास 400 से ज्यादा मिनिएचर कारों का संग्रह भी है।

विनोद अग्रवाल के बेटे हैं तपन अग्रवाल

तपन अग्रवाल, जो मध्य प्रदेश के सबसे अमीर कारोबारियों में से एक विनोद अग्रवाल के बेटे हैं, हमेशा से ही अपनी लग्जरी कारों के शौक के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई महंगी और आकर्षक कारें खरीदी हैं, जो उनके शानदार जीवनशैली की एक झलक दिखाती हैं।

लैम्बॉर्गिनी हुराकान ईवो स्पाइडरएवीडी लाए

हाल ही में उन्होंने अपने कार कलेक्शन में एक और शानदार कार को जोड़ा है – लैम्बॉर्गिनी हुराकान ईवो स्पाइडर एवीडी। 4 करोड़ रुपए की यह इटैलियन स्पोर्ट्स कार अपने आप में एक अलग ही रुतबा रखती है। लेकिन तपन ने इसे और भी खास बनाने के लिए 32 लाख रुपए खर्च करके इसका रंग कस्टमाइज करवाया है। यह रंग भारत में एकमात्र है, जो उनकी इस कार को और भी अनोखा बनाता है।

7 करोड़ रुपए की बेंटले बेंटायगा एसयूवी भी

इससे पहले तपन 7 करोड़ रुपए की बेंटले बेंटायगा एसयूवी खरीदकर सुर्खियों में आये थे। यह कार भी अपने आप में एक शानदार गाड़ी है, जो अपनी गति, आराम और लग्जरी के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, उनके पास 11 करोड़ 50 लाख रुपए कीमत वाली रोल्स रॉयस घोस्ट एक्सटेंडेड भी है, जो दुनिया की सबसे महंगी कारों में से एक मानी जाती है।

यह कार अपनी शानदार डिज़ाइन, बेहतरीन कारीगरी और अद्वितीय सवारी अनुभव के लिए जानी जाती है। तपन के कार कलेक्शन में 11 लाख रुपए की फोर्ड फिएस्टा जैसी कार भी शामिल है, जो दिखाता है कि उन्हें सिर्फ महंगी कारें ही पसंद नहीं हैं, बल्कि उन्हें अलग-अलग तरह की कारों में भी दिलचस्पी है।

मिनिएचर कारों का भी संग्रह

तपन के पास सिर्फ महंगी कारें ही नहीं हैं, बल्कि उनके पास 400 से ज़्यादा मिनिएचर कारों का भी संग्रह है। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही कारों का शौक रहा है और उन्होंने 4 साल की उम्र में ही मिनिएचर कारें इकट्ठा करनी शुरू कर दी थीं। उनके संग्रह में 1885 में लॉन्च हुई पहली मर्सिडीज कार का मिनिएचर मॉडल भी शामिल है। इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें कार चलाने वाली पहली महिला बार्थ बेंज का भी मॉडल है। तपन के संग्रह में सबसे सस्ती कार 1500 रुपए की फोर्ड मस्टैंग है, जबकि सबसे महंगी कार 3.5 लाख रुपये की हॉर्च 853 है। तपन का मानना है कि कारें सिर्फ एक सवारी का साधन नहीं हैं, बल्कि ये एक जुनून हैं।

मुइज्जू के बदले तेवर तो भारत से मिला रिटर्न गिफ्ट, मोदी से मुलाकात के बाद मालदीव के राष्ट्रपति को क्या मिला?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के बीच सोमवार मुलाकात हुई। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब हाल के कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच रिश्ते ठीक नहीं रहे। पीएम मोदी ने मालदीव को एक मित्र देश बताया साथ ही कहा कि भारत ने हमेशा पड़ोसी होने के दायित्व को निभाया है। मीटिंग में भारत और मालदीव के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। कुछ वक्त पहले मुइज्जू का झुकाव चीन की ओर अधिक था लेकिन देश की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हुई तब मुइज्जू के तेवर बदल गए। मुइज्जू को इसका फायदा भी मिला है। भारत ने कुछ समझौतों पर हामी भरकर मुइज्जू को रिटर्न गिफ्ट भी दिया है।

मालदीव को यूपीआई का मिलेगा फायदा
भारत और मालदीव ने रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के मकसद से 40 करोड़ डॉलर की मुद्रा अदला-बदली को लेकर समझौता किया। इससे मालदीव को विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव में रुपे कार्ड भी जारी किया। RuPay कार्ड की लॉन्चिंग के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वक्त में भारत और मालदीव यूपीआई के जरिए जुड़ जाएंगे। करेंसी स्वैप और रुपे कार्ड के अलावा दोनों देशों के बीच कई और भी समझौते हुए।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चार दिनों के भारत दौरे पर
हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में भारत ने मालदीव को 70 सामाजिक आवास भेंट किए। इन आवासों का निर्माण एक्ज़िम बैंक की वित्तीय सहायता से किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा आज हमने पुनर्विकसित हनीमाधू हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। अब ग्रेटर माले संपर्क परियोजना में भी तेजी लाई जाएगी।

हम थिलाफुशी में एक नये वाणिज्यिक बंदरगाह के विकास में सहायता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव ने अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया है।

दोनों देशों के बीच ऐसे बढ़ा था तनाव
भारत और मालदीव के बीच संबंधों में तब से तनाव आ गया जब से मुइज्जू (जिन्हें चीन समर्थक माना जाता है) ने पिछले साल नवंबर में शीर्ष पद का कार्यभार संभाला है। मुइज्जू ने पिछले साल ‘इंडिया आउट’ अभियान के तहत राष्ट्रपति चुनाव जीता था और नई दिल्ली से इस साल मई तक द्वीपसमूह में तैनात अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने को कहा था। जब मालदीव के मंत्रियों ने मोदी की आलोचना की थी, तब और भी द्विपक्षीय संबंधों में खटास आई थी।

हालांकि मुइज्जू के भारत विरोधी रुख में बदलाव आया है। मुइज्जू ने उन मंत्रियों को बर्खास्त भी कर दिया है, जो भारतीय प्रधानमंत्री की आलोचना करते थे। चूंकि मालदीव गंभीर आर्थिक मंदी से जूझ रहा है, इसलिए भारत ने एक और साल के लिए 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल को आगे बढ़ाते हुए मालदीव सरकार को महत्वपूर्ण बजटीय सहायता देने का फैसला किया है।

5 महीने से बीजपी का पट्टा लगाकर घूम रहीं कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे, जानें 150 दिन बाद भी इस्तीफे से क्यों डर रहीं?

बिना से विधायक निर्मला सप्रे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई हैं। उन्होंने बीना को जिला बनाने की शर्त रखी। 150 दिन बाद भी उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा नहीं दिया है, क्योंकि उन्हें उप-चुनाव का सामना करने से डर है। कांग्रेस ने उनके खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन पिटीशन दायर की है।

बीना: सागर जिले में कांग्रेस का परचम लहराने वाली एकमात्र विधायक निर्मला सप्रे को कांग्रेस छोड़े लगभग 5 महीने बीत चुके हैं। वह सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हो गई हैं। बीना की विधायक रहीं निर्मला सप्रे ने भाजपा में शामिल होने के बदले बीना को जिला बनाने की मांग पार्टी के सामने रखी थी, जो अब तक अधूरी है।

कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को दी थी पिटीशन

5 जुलाई को कांग्रेस ने निर्मला सप्रे को कांग्रेस विधायक के रूप में सदस्यता से अयोग्य ठहराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष डिस्क्वालिफिकेशन पिटीशन भी दायर की थी। इसके बावजूद वह अब तक कांग्रेस की विधायक बनी हुई हैं। विधायक निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर 5 मई को बीजेपी में शामिल हुई थीं।

कई बार मंच से कर चुकी हैं इस्तीफे की बात

होना तो ये चाहिए था कि वह कांग्रेस से त्यागपत्र दे देतीं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब इस बात को लगभग 150 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने न तो कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और न ही आधिकारिक तौर पर भाजपा ज्वाइन की है। हालांकि वह कई बार मंच से यह बात बोल चुकी हैं कि वह इस्तीफा देने वाली हैं।

क्यों हो रही देर?

अंदरखाने में चर्चा है कि इस्तीफा देने पर निर्मला सप्रे को उप-चुनाव का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए वह तैयार नहीं हैं। कांग्रेस से इस्तीफे के उन्हें जनता की नाराजगी का डर है। वह लगातार अपनी विधानसभा के दौरे कर रही हैं और जनता के बीच अपनी बात रख रही हैं। एक बार जनता को भरोसे में लेने के बाद ही वह इस्तीफे के बारे में विचार करेंगी।

Exit Poll के आंकड़ों पर बृजभूषण सिंह का आया बयान, हरियाणा को लेकर कही ये बात

दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर जारी किए गए एग्जिट पोल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में तो हमें दिखाई पड़ रहा है कि बीजेपी सरकार बनाएगी।
जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। 8 अक्टूबर को नजीते आएंगे। उससे पहले दोनों राज्यों को लेकर एग्जिट पोल जारी किए गए हैं, जिस पर तमाम सियासी पार्टियों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस बीच, दोनों राज्यों के नतीजे को लेकर भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह का भी बयान सामने आया है।
बृजभूषण सिंह से पूछा गया कि क्या लगता है हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कौन सरकार बनाएगा? इस पर उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में तो हमें दिखाई पड़ रहा है कि बीजेपी सरकार बनाएगी, जबकि हरियाणा को लेकर कहा कि यहां पर बोलना मना है।
क्या है पूरा मामला?

बता दें कि बीजेपी ने बृजभूषण शरण सिंह को पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया के खिलाफ बयानबाजी से दूर रहने की सलाह दी है। उन्होंने दोनों पहलवानों के खिलाफ कांग्रेस में शामिल होने पर निशाना साधा था। पूर्व WFI प्रमुख ने कहा कि विनेश और बजरंग ने कुश्ती में नाम कमाया, उसी से मशहूर हुए, लेकिन अब कांग्रेस में शामिल होने से उनका नाम मिट जाएगा। इसके साथ ही बृजभूषण ने विनेश पर कुश्ती को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विनेश और बजरंग ने कुश्ती के माहौल का खराब किया है।

वहीं, बृजभूषण ने कांग्रेस पर विनेश को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि हरियाणा चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस विनेश और बजरंग को मोहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। दरअसल, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया उन पहलवानों में शामिल थे, जिन्होंने बृजभूषण सिंह पर कई जूनियर महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए पिछले साल दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था और इसे लेकर भारतीय कुश्ती जगत में भारी बवाल देखने को मिला।