Tuesday, April 7, 2026
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निशातपुरा ओवरब्रिज अधूरा, जनता इंतज़ार में – उद्घाटन हुआ, मगर काम अब भी अधूरा

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रेलवे क्रॉसिंग नंबर 119 पर सर्विस रोड अटका अतिक्रमण में, निर्माण विभाग ने निगम को लिखा पत्र

भोपाल। निशातपुरा स्थित करोंद मंडी रेलवे क्रॉसिंग नंबर 119 पर बन रहे ओवरब्रिज का उद्घाटन तो बीते विधानसभा चुनावों से पहले हो गया, लेकिन जनता आज भी अधूरे निर्माण कार्य के कारण परेशानी झेल रही है। लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण संभाग) द्वारा तैयार किया जा रहा यह आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) करोंद चौराहे से लेकर डीआईजी बंगले की दिशा में अब भी अधूरा है, जिसकी मुख्य वजह अतिक्रमण को बताया गया है।

तीन बार पत्र, मगर कार्रवाई शून्य
सेतु निर्माण संभाग, भोपाल द्वारा नगर निगम को अतिक्रमण हटाने को लेकर पहले भी तीन बार पत्र भेजे जा चुके हैं बावजूद इसके आज तक निगम ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अब कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग ने एक बार फिर निगम आयुक्त को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि डीआईजी बंगले की ओर के अतिक्रमण को शीघ्र हटाया जाए ताकि ब्रिज के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण पूरा किया जा सके।

उद्घाटन में कोई कसर नहीं, निर्माण में लापरवाही क्यों?
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस अधूरे ओवरब्रिज का उद्घाटन प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग द्वारा फीता काटकर किया गया था। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले किसी भी कीमत पर ब्रिज की “उपलब्धि” जनता तक पहुंचाना उद्देश्य था। उद्घाटन भले हो गया, लेकिन जनता को अब भी अधूरे काम के कारण जाम, धूल और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार बनी, विधायक भी जीते – फिर अधूरा क्यों है ब्रिज?
मंत्री विश्वास सारंग न केवल चुनाव जीते, बल्कि सरकार भी दोबारा बनी। लेकिन इस ब्रिज के निर्माण को लेकर गंभीरता आज तक नहीं दिखी। अब जब चुनावी वादे पूरे करने का वक्त है, तो सवाल उठता है कि क्या यह अधूरा ब्रिज सिर्फ एक प्रचार का जरिया था?

जनता परेशान, सेवा रोड के लिए तरसती
रेलवे फाटक से करोंद चौराहे की तरफ सर्विस रोड का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन दूसरी तरफ का कार्य अटका हुआ है। स्थानीय लोग आए दिन ट्रैफिक में फंसते हैं, कई बार दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

अब क्या होगा?
लोक निर्माण विभाग ने पुनः निगम को पत्र भेजकर अतिक्रमण हटाने की अपील की है। यदि नगर निगम जल्द कार्रवाई करता है, तभी यह ओवरब्रिज पूरी तरह से जनता के उपयोग में आ सकेगा। सवाल यह है कि क्या नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस ओर गंभीरता से ध्यान देंगे या फिर जनता को और इंतज़ार करना होगा?

रिपोर्ट: ई खबर संवाददाता, भोपाल

हेड सफाई कर्मी पर बयान देने वाले सफाईकर्मी ने मांगी माफी, कहा – सस्पेंशन के बाद परिवार चलाना हुआ मुश्किल, अब न्याय की गुहार

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कानपुर। आउटसोर्सिंग के तहत हालेड चिकित्सालय, कानपुर में कार्यरत सफाईकर्मी रवि कुमार ने अपने वरिष्ठ हेड सफाईकर्मी राजकुमार के खिलाफ मीडिया में दिए गए बयान पर खेद जताते हुए विभाग से लिखित माफी मांगी है। रवि कुमार बीते पांच महीनों से अस्पताल में कार्यरत थे, लेकिन विवादित बयान के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

रवि कुमार, पुत्र प्रहलाद वाल्मीकि, निवासी आर/51, राम आसरे नगर, कच्ची बस्ती, गोविंद नगर, कानपुर नगर (उत्तर प्रदेश) ने प्रमुख अधीक्षक को पत्र सौंपते हुए अपने बयान को अनुचित बताया और स्वीकार किया कि इससे विभाग की छवि को ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।

हालांकि रवि कुमार ने आरोप लगाया कि माफी मांगने के बावजूद उन्हें ड्यूटी पर बहाल नहीं किया गया और बीते एक महीने से वे बिना वेतन घर पर बैठे हैं। उन्होंने स्वरूप नगर थाना और संबंधित चौकी में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

भावुक होकर बोले रवि कुमार –

“मेरे बीवी-बच्चों का गुजारा मुश्किल हो गया है। अगर मुझे नौकरी नहीं मिली तो मैं आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो सकता हूं। अगर मुझे या मेरे परिवार को कोई नुकसान हुआ तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।”

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उनके निलंबन को रद्द किया जाए और उन्हें पुनः ड्यूटी पर बहाल किया जाए।

रवि कुमार का यह भी आरोप है कि पिछले दो महीने से वह थानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही। उल्टा थाना प्रभारी उन्हें धमका रहे हैं और झूठे आरोप लगाने की बात कह रहे हैं।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार रवि कुमार का माफीनामा विचाराधीन है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस प्रकरण में क्या निर्णय लेता है।

वोटर लिस्ट पर लोगों को विश्वास नहीं, महाराष्ट्र में हुई धांधली’, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर फिर उठाए सवाल

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नई दिल्ली: कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हुए वोटर लिस्ट पर सवाल उठाया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट पर जनता को भरोसा नहीं है, इसमें फर्जी वोटर जोड़े गए। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव नतीजों का हवाला देते हुए यह बात कही।
वोट संविधान की नींव
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान की नींव वोट है। ऐसे में सोचना होगा कि क्या सही लोगों को वोट डालने दिया जा रहा है? क्या वोटर लिस्ट में फर्जी वोटर्स जोड़े गए।उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में चुनाव में चोरी हुई। हम महाराष्ट्र में 40 लाख वोटर रहस्यमयी हैं। वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह बताना चाहिए कि वोटर लिस्ट सही है या गलत?उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं उपलब्ध कराता? हमने आयोग से बार-बार डेटा मांगा लेकिन उन्होंने हमें नहीं दिया। डेटा तो छोड़िए हमें जवाब देने से भी इनकार किया।

राहुल गांधी ने कहा कि सत्ता-विरोधी भावना एक ऐसी चीज है जो हर लोकतंत्र में हर पार्टी को प्रभावित करती है। लेकिन किसी कारण से, भाजपा लोकतांत्रिक ढांचे में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो मूल रूप से सत्ता-विरोधी भावना से ग्रस्त नहीं है। एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल एक बात कहते हैं, आपने हरियाणा चुनाव में देखा, आपने मध्य प्रदेश चुनाव में देखा और फिर अचानक परिणाम बड़े पैमाने पर बदलाव के साथ पूरी तरह से अलग दिशा में चले जाते हैं। इसमें हमारा अपना आंतरिक सर्वेक्षण भी शामिल है, जो काफी परिष्कृत है।

5 महीनों में 5 साल से ज़्यादा वोटर्स जुड़े-राहुल
राहुल गांधी ने कहा, “… महाराष्ट्र में, 5 महीनों में 5 साल से ज़्यादा मतदाताओं के जुड़ने से हमारा संदेह बढ़ा और फिर शाम 5 बजे के बाद मतदान में भारी उछाल आया। लोकसभा चुनाव में हमारा गठबंधन पूरी तरह से साफ़ हो गया। यह बेहद संदिग्ध है। हमने पाया कि लोकसभा और विधानसभा के बीच एक करोड़ नए मतदाता जुड़ गए। हम चुनाव आयोग गए और हमारे तर्क का सार यह था कि महाराष्ट्र चुनाव चुराया गया था। समस्या की जड़ क्या है? मतदाता सूची इस देश की संपत्ति है। चुनाव आयोग हमें मतदाता सूची देने से इनकार कर रहा है।

40 हजार वोटरों का पता नहीं
राहुल गांधी ने आगे कहा- ऐसे 40 हजार वोटर हैं जिनके पते शून्य है या फिर है ही नहीं। अलग-अलग नाम और अलग-अलग परिवार के लोग और जब हम वहां जाते हैं तो पता चलता है कि वहां कोई रहता ही नहीं है। चुनाव आयोग के मुताबिक इन पतों पर कई लोग रहते हैं लेकिन जब हम वहां जाते हैं तो पता चलता है कि वहां कोई रहता ही नहीं है। वोटर लिस्ट में कई लोगों की तस्वीरे नहीं हैं और अगर है भी तो ऐसी जिन्हें देखकर मतदाताओं की पहचान ही नहीं हो सकती।

राहुल गांधी ने कहा, “वे(चुनाव आयोग) मुझ पर हमला नहीं कर रहे हैं। वे मुझ पर हमला करने से डरते हैं। उन्होंने मेरे खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया है क्योंकि वे जानते हैं कि मैं सच कह रहा हूं। वे(चुनाव आयोग) बोलते हैं लेकिन मुझ पर हमला नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि हम सच कह रहे हैं।”

विवादों में घिरे संत अनिरुद्धाचार्य और श्री प्रेमानंद जी महाराज: बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने का आरोप

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हाल ही में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य जी महाराज और श्री प्रेमानंद जी महाराज के एक कथन को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर जबरदस्त विवाद छिड़ गया है। वायरल हो रहे एक वीडियो क्लिप में दोनों संतों द्वारा कथित तौर पर महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है, जबकि संतों के अनुयायी और समर्थक इसे गलत संदर्भ में पेश किया गया बयान बता रहे हैं।

विवाद की जड़ में है एक कथन, जिसमें कहा गया —
“आज की कुछ स्त्रियाँ चार जगह मुँह मारती हैं…”।

इस बयान पर कई लोग भड़क उठे और इसे संपूर्ण नारी समाज का अपमान बताने लगे। हालांकि, संतों के समर्थकों का कहना है कि यह कथन सभी महिलाओं पर नहीं, बल्कि कुछ भटकी हुई प्रवृत्ति की महिलाओं के संदर्भ में था, और इसी प्रकार के पुरुषों पर भी तीखी टिप्पणी की गई थी।

दोनों संतों के कथनों का मूल भाव क्या था?

संत अनिरुद्धाचार्य जी और श्री प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचनों में बार-बार यह बात कही जाती रही है कि समाज में नैतिकता, चरित्र और पारिवारिक मूल्यों का पतन हो रहा है। वे इस गिरावट के लिए स्त्रियों और पुरुषों दोनों की असंयमित जीवनशैली को जिम्मेदार मानते हैं। एक प्रवचन में उन्होंने स्पष्ट कहा:

“जो पुरुष अपनी पत्नी को धोखा देगा, या किसी अन्य स्त्री से अवैध संबंध रखेगा, वह भी चरित्रहीन कहलाएगा। और यही बात स्त्रियों पर भी लागू होती है।”

इस कथन का आशय था कि चरित्रहीनता का लिंग से कोई संबंध नहीं है – जो भी अपने दांपत्य धर्म से भटकता है, वह दोषी है।

संतों के समर्थकों की प्रतिक्रिया

फिरोजाबाद जिले के गांव रुधऊ, थाना नारखी, पोस्ट नगला बीच निवासी आचार्य गौरव (उम्र 33 वर्ष), पिता श्री केशव देव शास्त्री, ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“संत समाज को आइना दिखाने का कार्य कर रहा है। आज माता-पिता अपने बच्चों से कुछ कहने से डरते हैं, ऐसे में अगर संत समाज इन मुद्दों को मंच से उठा रहा है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए, ना कि आलोचना। उन्होंने जो भी कहा है, वह समाज के एक वर्ग के बारे में है, सभी स्त्रियों के बारे में नहीं।”

गौरव का मानना है कि संतों के बयानों को राजनीतिक और वैचारिक कारणों से जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके।

सोशल मीडिया पर दो धाराएँ

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर दो धाराएँ बन चुकी हैं।

एक पक्ष कहता है कि सार्वजनिक मंच से इस प्रकार की भाषा का प्रयोग अपमानजनक और अनुचित है, भले ही आशय कुछ भी रहा हो।

वहीं, दूसरा पक्ष मानता है कि संतों ने समाज के वर्तमान नैतिक संकट की ओर ध्यान दिलाया है, और उनका उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि सुधार की ओर प्रेरित करना है।

यह स्पष्ट है कि बयान के पीछे भावना समाज में गिरते नैतिक मूल्यों के प्रति चिंता है। परंतु प्रस्तुति का तरीका और संदर्भों की स्पष्टता बेहद जरूरी होती है, खासकर जब आप लाखों लोगों तक अपनी बात पहुँचा रहे हों। ऐसे में ज़रूरत है कि संत समाज भी अपनी भाषा और प्रस्तुति में संयम बरते, और सामाजिक मीडिया व अन्य माध्यम भी बिना संदर्भ के किसी भी बयान को सनसनीखेज़ रूप न दें।

दबंगों ने महिला का फूस का घर उजाड़ा, की लूटपाट व मारपीट; चांदी की सिकड़ी भी छीनी

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पीड़िता ने पुलिस से की सख्त कार्रवाई की मांग, पूरी घटना का वीडियो भी मौजूद

रुन्नीसैदपुर (सीतामढ़ी)।
थाना क्षेत्र के सोनपुरवा गांव में दबंगई की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गांव की रहने वाली चन्द्र किशोरी देवी पत्नी जगरनाथ सहनी ने थानाध्यक्ष रुन्नीसैदपुर को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि 17 जुलाई 2025 को दिन के करीब 2 बजे उनके फूस के घर पर गांव के ही कुछ दबंग लोगों ने हमला कर दिया।

पीड़िता के अनुसार, रामकिशोर सहनी, रवि कुमार, विनोद सहनी, योगी सहनी, अयोध्या सहनी, अर्जुन सहनी और मंजू देवी जैसे कई लोग लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर आए और उनके फूस के मकान को काट-पीट कर तहस-नहस कर दिया।

जब पीड़िता व उनकी बेटी ने विरोध किया, तो आरोपियों ने मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी। घर में रखा सामान तोड़ा गया और संदूक से 55,000 रुपये नकद लूट लिए गए, जो घर निर्माण के लिए रखे गए थे। इसके अलावा, मालती देवी नामक महिला ने पीड़िता के गले से चांदी की सिकड़ी (करीब 16,000 रुपये मूल्य की) छीन ली।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनकी साड़ी खींच कर उनकी इज्जत लूटने का प्रयास किया। लेकिन शोर सुनकर उनके पति और गांव के अन्य लोग मौके पर पहुंचे, जिससे पीड़िता की जान और इज्जत बच सकी।

पीड़िता के अनुसार, यह लोग पहले भी मारपीट और गाली-गलौज करते रहे हैं और गांव में अपनी दबंगई के लिए कुख्यात हैं। घटना का वीडियो भी उपलब्ध है, जिसे पुलिस को सौंपा गया है।

पीड़िता ने थाना प्रभारी से गुहार लगाई है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

तीन बच्चों की मां छोड़ गई घर, मायके जाकर रचाई दूसरी शादी! पीलीभीत के सुमेरलाल ने लगाई न्याय की गुहार

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पीलीभीत (उत्तरप्रदेश)।
एक टूटते हुए परिवार की वेदना, तीन मासूम बच्चों का दर्द और एक बेबस पति की गुहार—यह कहानी है पीलीभीत जिले के बीसलपुर तहसील के गाँव उमरा खान सिंह निवासी सुमेरलाल की, जिसकी पत्नी भावना देवी पिछले नौ महीनों से मायके जाने के बाद लौटकर नहीं आई। अब खबर है कि उसने किसी और से शादी रचा ली है।

सुमेरलाल का आरोप है कि 28 नवम्बर 2023 को उसकी पत्नी अपने भाई रवि के साथ मायके चली गई थी। तब उसने सोचा था कि कुछ दिनों में लौट आएगी, लेकिन वक्त बीतता गया, महीने गुजर गए और अब तक भावना देवी का कोई अता-पता नहीं। कई बार वह खुद अपनी पत्नी को लेने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के लोहाठी गाँव, थाना कलानीछीन गया, लेकिन हर बार उसे तिरस्कार, गालियाँ और धमकियाँ मिलीं।

“पत्नी और उसके परिवारवालों ने मारपीट की, कहा – दोबारा यहाँ मत आना!”

सुमेरलाल का कहना है कि जब उसने अपनी पत्नी से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल बंद मिला। बाद में पता चला कि भावना देवी अब किसी और के साथ रह रही है और शादी भी कर चुकी है। यह सुनकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
तीन मासूम बच्चे, जो अपनी मां की ममता को तरस रहे हैं, अब अपनी बूढ़ी दादी के सहारे जिंदगी काट रहे हैं। सबसे बड़ा बेटा स्कूल नहीं जा पा रहा और छोटे बच्चे मां की गोद के लिए हर रात बिलखते हैं।

“बिना पत्नी के परिवार बिखर गया है, प्रशासन मेरी मदद करे”

मीडिया से बात करते हुए भावुक सुमेरलाल ने कहा,

“मैं टूट गया हूँ। मेरी जिंदगी की नींव छिन गई है। मेरी पत्नी न बच्चों की परवाह कर रही है, न इस रिश्ते की। मेरी गुज़ारिश है कि प्रशासन और पुलिस मेरी पत्नी को वापस भेजने में मदद करे।”

प्रशासन से गुहार – इंसाफ चाहिए!

सुमेरलाल ने स्थानीय पुलिस, तहसील प्रशासन और उत्तराखंड के संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वह भावना देवी को उसके बच्चों के पास वापस लाएं। अगर भावना देवी ने दूसरी शादी कर ली है, तो कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर वैवाहिक विश्वासघात और बच्चों के अधिकारों का हनन है।

सवाल प्रशासन से

क्या तीन मासूम बच्चों की भावनाओं का कोई मोल नहीं?

क्या एक पत्नी बिना तलाक के दूसरी शादी कर सकती है?

क्या एक पति की जिंदगी यूं ही तबाह होने दी जाएगी?

सजेती से लापता 14 साल की लक्ष्मी का मामला गहराया — अधेड़ उम्र के व्यक्ति पर शक, जीजा बोले- “हमारी परवरिश पर सवाल क्यों?”

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ग्राम मेहरअलीपुर, थाना सजेती से 14 वर्षीय बालिका लक्ष्मी के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला अब गंभीर मोड़ ले चुका है। सूत्रों के अनुसार लक्ष्मी 21 मई 2025 की सुबह करीब 6 बजे अपने घर से अचानक गायब हो गई थी। परिजनों ने रिश्तेदारी और आस-पड़ोस में खोजबीन की लेकिन लड़की का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।

अब इस मामले में परिवार और सामाजिक सरोकारों की परतें खुलने लगी हैं। बताया जा रहा है कि लक्ष्मी पिछले चार वर्षों से अपनी बड़ी बहन शिवानी और जीजा के साथ ग्राम पतारा, थाना घाटमपुर में रह रही थी। वह वहीं के कमल स्कूल में पढ़ाई भी कर रही थी।

नाबालिग लक्ष्मी के गायब होने से जीजा परेशान, उठाए अहम सवाल
लक्ष्मी के जीजा का कहना है कि उन्होंने और उनकी पत्नी शिवानी ने लक्ष्मी की परवरिश एक बेटी की तरह की। “जब वह 10 साल की थी, तभी से हमारे साथ रह रही थी। हमने उसे पढ़ाया, खिलाया और बेटी की तरह संभाला। लेकिन जब वह लापता हुई तो उसी समाज ने मुझ पर उंगली उठा दी, जिसकी जिम्मेदारी हमने निभाई थी।”

जीजा का आरोप है कि लक्ष्मी किसी अधेड़ उम्र के व्यक्ति के साथ भागी है, जिसकी उम्र करीब 30 वर्ष बताई जा रही है। “वह आदमी उसकी उम्र से दुगुना बड़ा है, और अगर उसने कोई गलत काम कर दिया तो कौन जिम्मेदार होगा?” – जीजा ने रोष भरे लहजे में कहा।

लड़की के मां-बाप ने उठाया सवाल — जीजा का पलटवार
लक्ष्मी के माता-पिता ने जब जीजा और बहन शिवानी से सवाल किया कि चार साल की परवरिश में बस यही सीखा?, तो जीजा का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि “परवरिश सिर्फ खाना खिलाना नहीं होता, हमनें बेटी समझकर उसका हर ख्याल रखा, लेकिन अब सारा दोष हम पर मढ़ा जा रहा है।”

शक के घेरे में जाट दीपक चौधरी उम्र(35वर्ष) नामक अधेड़ — पुलिस जांच में जुटी
परिवार को शक है कि दीपक नामक एक अधेड़ व्यक्ति, जिसकी उम्र करीब 35वर्ष बताई जा रही है, लक्ष्मी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। सूत्रों के अनुसार, लक्ष्मी पिछले कुछ समय से मोबाइल पर किसी से बातचीत कर रही थी। आशंका है कि उसी व्यक्ति ने उसे झांसे में लिया और मौका देखकर उसे भगा ले गया।

“लक्ष्मी नाबालिग है, किसी भी मानसिक दबाव में आ सकती है” – जीजा
दीपक ने बताया कि लक्ष्मी अभी पूरी तरह बालिग भी नहीं हुई है और इस उम्र में बच्चे बहक भी सकते हैं। “उसके मन में क्या चल रहा था, हमें भनक तक नहीं लगी, लेकिन जब यह समझ आया कि वह किसी से संपर्क में है, तब तक वह घर छोड़ चुकी थी।”

थाने में दी गई तहरीर, पुलिस सतर्क
शिवानी ने थाना सजेती में अपनी बहन लक्ष्मी की गुमशुदगी की सूचना 28 मई को दर्ज कराई है। पुलिस ने संभावित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी है और दीपक नाम के उस संदिग्ध व्यक्ति की खोज भी शुरू हो गई है।

समाज की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
यह मामला सिर्फ एक लड़की के लापता होने का नहीं है, बल्कि एक ऐसी सामाजिक पीड़ा का भी है जहाँ परवरिश करने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। सवाल यह भी है कि एक नाबालिग बच्ची को अधेड़ उम्र का व्यक्ति कैसे बहका सकता है और उसके आसपास के लोग इस पर कैसे खामोश रह सकते हैं।

विशेष रिपोर्ट, ई खबर संवाददाता, कानपुर नगर

ग्रामवासी वर्षों से परेशान, न सड़क बनी न समाधान – रोहित पांडे ने उठाई आवाज

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जौनपुर – जनपद के अंतर्गत आने वाले एक गांव में सड़क की बदहाल स्थिति और प्रशासन की अनदेखी के चलते ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता रोहित पांडे, उम्र 27 वर्ष, जो इसी थाना क्षेत्र के निवासी हैं, ने बताया कि पिछले 5–6 वर्षों से यह समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के मुख्य रास्ते में पहले खरंजा बना हुआ था, जो अब पूरी तरह टूट चुका है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब पूरे रास्ते में पानी भर जाता है। चारों तरफ कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन ठप हो जाता है।

स्थिति को और भी विकराल बना दिया है रास्ते के दोनों ओर स्थित खेतों के मालिकों ने। उन्होंने अपने खेत बढ़ाते हुए रास्ते को इतना संकरा कर दिया है कि अब वहां से न तो चार पहिया वाहन गुजर सकते हैं और न ही कोई आपातकालीन सेवा जैसे एंबुलेंस।

“गांव में यदि कोई बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो एंबुलेंस रास्ते में ही फंस जाती है। कई बार मरीजों की हालत खराब हो चुकी है, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है,” – रोहित पांडे ने कहा।

गांव के लोगों का आरोप है कि वे लगातार जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधान, ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक न तो कोई सर्वे हुआ और न ही कोई मरम्मत या निर्माण कार्य।

स्थानीय प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर सरकार ग्रामीण विकास और “हर गांव तक सड़क” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सड़क की मरम्मत एवं चौड़ीकरण का कार्य नहीं शुरू हुआ, तो वे सामूहिक रूप से धरना प्रदर्शन करने पर विवश होंगे।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस बार ग्रामीणों की पीड़ा पर ध्यान देगा या फिर यह समस्या एक और चुनावी वादा बनकर रह जाएगी।

 

भोपाल विभाग संयोजक बने अभिजीत सिंह राजपूत, संगठन के प्रति जताया आभार

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भोपाल। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल भोपाल विभाग के संगठनात्मक ढांचे में अहम बदलाव करते हुए अभिजीत सिंह राजपूत जी को भोपाल विभाग का विभाग संयोजक और विजेंद्र परिहार जी को जिला वीर सावरकर का सह-मंत्री और राकेश रायकवार को जिला वीर सावरकर का सह संयोजक नियुक्त किया गया है। इस निर्णय के बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

नव नियुक्त विभाग संयोजक अभिजीत सिंह राजपूत ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आत्मीय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निभाऊंगा। सभी शुभचिंतकों का धन्यवाद करता हूं।”

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद जिला वीर सावरकर प्रताप प्रखंड मंत्री अभिषेक कुशवाह ने दोनों पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन नई दिशा में मजबूत कार्य करेगा।

संगठन के अनुसार आने वाले समय में विभागीय स्तर पर कई जनजागरण अभियान, सामाजिक कार्यक्रम और युवाओं को जोड़ने की पहल की जाएगी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नई टीम के नेतृत्व में संगठन और अधिक सक्रिय और सशक्त रूप से कार्य करेगा।

स्थानीय संवाददाता दामोदर सिंह राजावत की खबर

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सुपरस्टार पिता की एक्स गर्लफ्रेंड से मिलती है हीरोइन की शक्ल, जब पूछा सवाल तो एक्ट्रेस ने खोल दी थी सच्चाई

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सोनाक्षी सिन्हा के पिता शत्रुघ्न सिन्हा भी अपने समय के सुपरस्टार रहे हैं। सोनाक्षी का चेहरा भी अपने पिता की एक्स गर्लफ्रेंड रहीं रीना रॉय से मिलती हैं। इसको लेकर सोनाक्षी ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी।बॉलीवुड हीरोइन सोनाक्षी सिन्हा इन दिनों अपने पति के साथ अक्सर ही सुर्खियां बटोरती रहती हैं। कभी घूमने को लेकर तो कभी अपनी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहने वाली सोनाक्षी के पिता शत्रुघ्न सिन्हा भी अपने समय के सुपरस्टार रहे हैं। लेकिन खास बात ये है कि सोनाक्षी सिन्हा का चेहरा उनके पिता की एक्स गर्लफ्रेंड रीना रॉय से मिलता है। इसको लेकर सोनाक्षी सिन्हा से भी कई बार सवाल पूछा गया। सोनाक्षी ने भी इसके पीछे की मिस्ट्री का खुलासा किया था। साथ ही रीना रॉय ने भी इसको लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

शत्रुघ्न सिन्हा की गर्लफ्रेंड रही थीं रीना रॉय
शत्रुघ्न सिन्हा और रीना रॉय की लवस्टोरी साल 1976 में शुरू हुई थी। दोनों फिल्म कालीचरण में नजर आए थे और यहीं से दोनों की दोस्ती हुई और बाद में प्यार हो गया। दोनों कुछ समय तक रिलेशनशिप में रहे और आगे जाकर दोनों के बीच अलगाव हो गया। शत्रुघ्न सिन्हा ने पूनम को चुना और शादी कर ली। शादी के कुछ समय बाद दोनों के तीन बच्चे हुए। लेकिन जब जुड़वां बेटों के बाद शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी हुई तो उसकी शक्ल रीना रॉय से मिलती थी। जब सोनाक्षी सिन्हा बड़ी हुईं तो लोगों ने ये भी नोटिस किया और जब वे फिल्मी दुनिया की स्टार बन गईं तो लोगों ने इसको लेकर सवाल भी पूछे। सोनाक्षी सिन्हा ने भी बताई थी वजह
इसको लेकर सोनाक्षी सिन्हा से भी जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि ‘जब मैं बड़ी हुई तो मुझे ये बात समझ आई। लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपनी मां पूनम सिन्हा की तरह दिखती हूं। मैं अपने पिता के अतीत में नहीं झांकना चाहती।’ बता दें कि सोनाक्षी सिन्हा और रीना रॉय के चेहरे की समानता को लेकर काफी समय से फैन्स बातें करते रहे हैं। इसको लेकर रीना रॉय से भी जब पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि ये जिंदगी के इत्तेफाक हैं। मेरी मां और एक बॉलीवुड स्टार की मां बिल्कुल जुड़वां बहनें लगती थीं। ये सब जिंदगी के इत्तेफाक होते हैं जिनका कोई ठोस कारण नहीं होता।

अपने समय की सुपरस्टार रहीं रीना रॉय
रीना रॉय अपने समय की स्टार रहीं हैं और बॉलीवुड की 109 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं रीना आखिरी बार फिल्म रिफ्यूजी में नजर आईं थीं। इस फिल्म में अभिषेक बच्च ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। साल 1972 में अपने करियर की शुरुआत करने वाली रीना रॉय ने चंद फिल्मों में ही शोहरत हासिल कर ली थी। इतना ही नहीं रीना ने कई सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया। शत्रुघ्न सिन्हा की फिल्म कालीचरण में भी रीना ने कमाल का किरदार निभाया था। यहीं से दोनों के बीच प्यार पनपा था जो आगे जाकर फेल हो गया।