गुरुग्राम।
हरियाणा के गुरुग्राम निवासी दीनानाथ ने एक हर्बल हेल्थकेयर कंपनी पर इलाज के नाम पर कथित रूप से एक लाख तेईस हजार रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि कंपनी के प्रतिनिधि आलोक कुमार ने लगातार फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से अलग-अलग कारण बताकर उनसे पैसे जमा कराए, लेकिन न तो उनका पैसा वापस किया गया और न ही किए गए वादे पूरे हुए। अब पीड़ित ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दीनानाथ के अनुसार, उन्होंने हर्बल उपचार के लिए कंपनी से संपर्क किया था। इसके बाद कंपनी की ओर से आलोक कुमार नामक व्यक्ति लगातार उनके संपर्क में रहा। आरोप है कि 26 मार्च से लेकर 1 जुलाई तक अलग-अलग शुल्क, क्लियरेंस, एनओसी और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर उनसे बार-बार रकम जमा कराई गई। इस दौरान कुल मिलाकर उनसे लगभग एक लाख तेईस हजार रुपये ले लिए गए।
पीड़ित का कहना है कि हर भुगतान के बाद उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि अब उनका चेक क्लियर हो जाएगा, एनओसी जारी हो जाएगी और कुछ ही मिनटों में पूरी राशि उनके खाते में वापस भेज दी जाएगी। लेकिन हर बार नए शुल्क की मांग कर दी जाती थी। व्हाट्सएप पर भेजे गए संदेशों में भी कंपनी की ओर से यह दावा किया गया कि एक निश्चित राशि जमा करने के बाद 44 हजार रुपये का ऑटो रिफंड कर दिया जाएगा और आगे कोई समस्या नहीं होगी। हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि ये सभी दावे केवल पैसे ऐंठने के लिए किए गए।
दीनानाथ ने बताया कि उन्होंने कई बार कंपनी के प्रतिनिधि से कहा कि अब उन्हें किसी भी आश्वासन पर विश्वास नहीं है, क्योंकि हर बार नए बहाने बनाकर पैसे मांगे जाते रहे। इसके बावजूद कंपनी की ओर से लगातार भुगतान करने का दबाव बनाया जाता रहा।
मामले को और भी गंभीर बनाते हुए पीड़ित ने बताया कि 30 जून को उनका सड़क हादसा हो गया था। बाइक दुर्घटना में उनके पैर की एड़ी का काफी मांस निकल गया और हड्डी भी फ्रैक्चर हो गई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधि को अपनी स्थिति बताई, लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी उनसे पैसे मांगने का सिलसिला नहीं रुका। लगातार संदेश भेजकर उनसे और भुगतान करने के लिए कहा जाता रहा।
पीड़ित का आरोप है कि कंपनी झारखंड के जमशेदपुर स्थित कार्यालय का पता बताकर काम कर रही है, जबकि आलोक कुमार वैशाली जिले का निवासी बताया जा रहा है। अब दीनानाथ ने प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित रूप से ठगे गए एक लाख तेईस हजार रुपये वापस दिलाने तथा इस प्रकार लोगों को झांसे में लेकर पैसे वसूलने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला इलाज और रिफंड के नाम पर लोगों को झूठे आश्वासन देकर आर्थिक शोषण करने के गंभीर आरोपों से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


