Thursday, June 25, 2026
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एक्टिवा का बीमा कराया, फिर भी नहीं मिला दावा भुगतान, युवक ने बीमा कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप

ग्वालियर। बीमा कंपनियां अक्सर ग्राहकों को यह भरोसा दिलाती हैं कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में उनका आर्थिक नुकसान कम होगा, लेकिन ग्वालियर के एक युवक का आरोप है कि बीमा कराने के बावजूद उसे उसका दावा भुगतान नहीं मिल रहा है। इस मामले ने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली और ग्राहकों के अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्वालियर के जडेरुआ कलां पिंटो पार्क क्षेत्र निवासी भूपेंद्र राजावत ने अपनी होंडा एक्टिवा का बीमा कराया था। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वाहन का बीमा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से कराया गया था। भूपेंद्र का कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत बीमा करवाया और निर्धारित प्रीमियम भी जमा किया, लेकिन जब उन्होंने बीमा लाभ की मांग की तो उन्हें राहत नहीं मिली।

भूपेंद्र राजावत का आरोप है कि बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने दावा भुगतान देने से इनकार करते हुए कहा कि वाहन का कोई दुर्घटनाग्रस्त होना साबित नहीं हुआ है, इसलिए बीमा राशि नहीं दी जा सकती। युवक का कहना है कि जब उसने नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान किया है और बीमा पॉलिसी सक्रिय है, तो उसकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाना चाहिए था।

पीड़ित का आरोप है कि वह कई बार संबंधित अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों से संपर्क कर चुका है, लेकिन अब तक उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उसका कहना है कि लगातार चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे वह मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहा है।

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि किसी बीमाधारक की शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि दावा नियमों के अनुरूप बनता है तो उसे समय पर भुगतान मिलना चाहिए। वहीं यदि किसी कारणवश दावा अस्वीकार किया गया है तो बीमा कंपनी को स्पष्ट रूप से लिखित कारण बताने चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटर बीमा पॉलिसी के तहत भुगतान तभी किया जाता है जब दावा पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप हो। दुर्घटना, वाहन क्षति, चोरी या अन्य कवर किए गए जोखिमों के संबंध में आवश्यक दस्तावेज, निरीक्षण रिपोर्ट और प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ता है। ऐसे मामलों में विवाद होने पर बीमाधारक बीमा कंपनी के शिकायत निवारण तंत्र, बीमा लोकपाल अथवा संबंधित नियामक मंचों का सहारा ले सकता है।

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