कंचन की रिपोर्ट
शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम कमालपुर में हनुमान मंदिर के आसपास स्थित भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। वर्षों पुराने राजस्व रिकॉर्ड, बंदोबस्त की कथित त्रुटियों और भूमि सीमांकन के मुद्दे ने अब नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि बंदोबस्त के दौरान हुई गंभीर गलती के कारण उनकी निजी कृषि भूमि को मंदिर की भूमि में जोड़ दिया गया, जिससे उनकी जमीन का रकबा कम हो गया। अब इसी विवादित भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा पानी की टंकी निर्माण की तैयारी किए जाने से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
ग्राम कमालपुर निवासी शंकरलाल शर्मा, गोविन्दराम शर्मा एवं अन्य किसानों का कहना है कि हनुमान मंदिर के पास स्थित सर्वे नंबर 838 एवं 839 की भूमि का मूल रकबा लगभग 0.418 हेक्टेयर था, लेकिन वर्ष 2011-12 के बंदोबस्त के दौरान कथित त्रुटि के चलते इसे बढ़ाकर नए सर्वे नंबर 675 में लगभग 0.620 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया। किसानों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उनकी निजी भूमि का हिस्सा भी मंदिर की भूमि में जोड़ दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रार्थियों के अनुसार उनकी पुश्तैनी भूमि सर्वे नंबर 1183 रकबा 0.257 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी, लेकिन बंदोबस्त के बाद यह भूमि रिकॉर्ड में मंदिर की भूमि में समाहित हो गई। किसानों का दावा है कि इस त्रुटि के कारण उनकी लगभग 16 बिस्वा भूमि प्रभावित हुई है। उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार, कलेक्टर, एसडीएम न्यायालय शुजालपुर सहित विभिन्न राजस्व अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक अंतिम निराकरण नहीं हो सका है।
मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय शुजालपुर में प्रकरण भी विचाराधीन बताया जा रहा है। इसी बीच ग्राम पंचायत द्वारा विवादित क्षेत्र में पानी की टंकी निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की सूचना मिलने पर किसानों ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जब तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए, अन्यथा भविष्य में भूमि विवाद और अधिक जटिल हो जाएगा।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार नायब तहसीलदार कालापीपल द्वारा जनवरी 2026 में संबंधित राजस्व निरीक्षक और पटवारियों को भूमि सीमांकन करने के आदेश भी जारी किए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से आवेदित भूमि का सीमांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
विवाद को लेकर ग्राम स्तर पर पंचनामा भी तैयार किया गया, जिसमें स्थानीय पंचों ने यह उल्लेख किया कि मंदिर परिसर और उसके आसपास की भूमि के रकबे में बढ़ोतरी होने से कई किसानों की जमीन प्रभावित हुई है। पंचनामे में यह भी कहा गया कि जब तक संबंधित प्रकरण का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक विवादित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करता और विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहता है तो क्षेत्र में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले भूमि सीमांकन, रिकॉर्ड की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कराई जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जाए।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और न्यायालय के आगामी फैसले पर टिकी हैं। देखना होगा कि वर्षों से चले आ रहे इस भूमि विवाद का समाधान कब निकलता है और प्रभावित किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं।#HanumanMandirLandDispute
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