दिल्ली के शाहदरा इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पिता अपनी बेटी को उसी संस्थान की सीनियर सेकेंडरी शाखा में दाखिला दिलाने के लिए महीनों से दर-दर भटक रहा है, लेकिन स्कूल प्रशासन द्वारा उसे प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया गया है। आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद न तो कोई स्पष्ट कारण बताया जा रहा है और न ही समस्या का समाधान किया जा रहा है।
पीड़ित अमित कुमार, जो शाहदरा के तेलीवाड़ा इलाके के निवासी हैं, का कहना है कि उनकी बेटी भूमि पहले कृष्णा नगर स्थित हंस राज स्मारक स्कूल में कक्षा 8 तक पढ़ाई कर चुकी है। अब परिवार चाहता था कि वह उसी संस्थान की दिलशाद गार्डन स्थित सीनियर सेकेंडरी शाखा में आगे की पढ़ाई जारी रखे। लेकिन विद्यालय प्रशासन ने अचानक उसे प्रवेश देने से मना कर दिया। पिता का आरोप है कि कई बार स्कूल के अधिकारियों से मिलने के बाद भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
अमित कुमार का कहना है कि जब उन्होंने विद्यालय प्रशासन से कारण जानने की कोशिश की तो कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक लहजे में कहा कि “आप किसी से भी शिकायत कर लें, हम एडमिशन नहीं देंगे।” इस कथन से परेशान पिता का कहना है कि यह न केवल उनके परिवार के लिए अपमानजनक है बल्कि उनकी बेटी के शिक्षा के अधिकार का भी सीधा उल्लंघन है। उनका कहना है कि बेटी पढ़ाई में मेहनती और अनुशासित छात्रा है, लेकिन कुछ पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसके अंक अपेक्षा से कम, लगभग 50 प्रतिशत आए थे।
मामले को सुलझाने के लिए पीड़ित परिवार ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया। कृष्णा नगर क्षेत्र के विधायक अनिल गोयल ने पीड़ित के पक्ष में एक लिखित अनुशंसा पत्र भी दिया, जिसमें मानवीय आधार पर बच्ची को प्रवेश देने का आग्रह किया गया था। हालांकि पिता का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने इस सिफारिश को भी स्वीकार करने से मना कर दिया और कोई कार्रवाई नहीं की।
न्याय की उम्मीद में अमित कुमार ने इस मामले की शिकायत केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल CPGRAMS और दिल्ली शिक्षा निदेशालय में भी दर्ज कराई है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति भवन को भी लिखित शिकायत भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पिता का कहना है कि बेटी का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है और समय निकलता जा रहा है, लेकिन अब तक कहीं से भी समाधान नहीं मिल पाया है।
पीड़ित का कहना है कि यह केवल उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के अधिकार और स्कूलों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए जाएं ताकि उनकी बेटी को जल्द से जल्द प्रवेश मिल सके और उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
वहीं इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि कोई छात्र पहले उसी संस्थान में पढ़ चुका है और आगे पढ़ाई जारी रखना चाहता है, तो उसे उचित कारण बताए बिना प्रवेश से वंचित करना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित छात्रा को न्याय कब तक मिल पाता है।


