अशोकनगर। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुताई का काम करने गया 23 वर्षीय युवक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। पीड़ित के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ संदिग्ध परिस्थिति में गंभीर घटना हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। परिवार ने इस पूरे मामले में साजिश की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता केसरी लाल, निवासी ग्राम राजपुर, पोस्ट राजपुर, जिला अशोकनगर (मध्यप्रदेश) ने बताया कि उनका बेटा मुरली (उम्र करीब 23 वर्ष) पिछले चार-पांच दिनों से हटा खेड़ी गांव के एक जमींदार के यहां पुताई का काम करने गया हुआ था। 31 मार्च 2026 की शाम करीब 5 बजे अचानक मुरली की हालत बिगड़ने की सूचना मिली। आरोप है कि जमींदार द्वारा उसे अशोकनगर के एक अस्पताल में लाया गया, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज करने से मना कर दिया।
इसके बाद मुरली को भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। पीड़ित पिता का कहना है कि 1 अप्रैल को जमींदार ने फोन कर उन्हें बताया कि उनका बेटा पुताई करते समय ऊंचाई से गिर गया है, इसलिए उसे भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही परिवार के लोग तुरंत भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि मुरली की हालत बेहद गंभीर है और वह अब तक होश में नहीं आया है।
परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया है कि युवक की हालत बहुत नाजुक है और उसके बचने की संभावना बेहद कम है। डॉक्टरों के अनुसार उसके बचने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत बताई जा रही है। इस खबर के बाद से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन लगातार अस्पताल में उसके होश में आने का इंतजार कर रहे हैं।
पीड़ित पिता केसरी लाल ने इस घटना को लेकर जमींदार पर गंभीर शक जताया है। उनका कहना है कि उन्हें लगता है कि उनके बेटे के साथ मारपीट या कोई अन्य गंभीर घटना हुई हो सकती है, जिसे छिपाने के लिए गिरने की कहानी बताई जा रही है। पिता का आरोप है कि जमींदार ने इलाज के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी और उल्टा उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।
पिता ने यह भी बताया कि जमींदार उनके मोबाइल नंबर पर फोन कर धमकी देता है कि “जो करना है कर लो।” पीड़ित का कहना है कि उनके पास कीपैड फोन होने के कारण वे इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग भी नहीं कर पाए हैं, जिससे वे सबूत जुटाने में भी असमर्थ हैं।
मामले को लेकर पीड़ित पिता अशोकनगर थाने और चौकी में भी शिकायत करने पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। वे कई बार पुलिस के पास जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
इधर परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है। भोपाल में चल रहे इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिता का कहना है कि उनके पास बेटे के इलाज के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं हैं और वे प्रशासन से आर्थिक मदद और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और यदि इसमें किसी की लापरवाही या साजिश सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।


