Saturday, February 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeNationalनीमराणा में 12 वर्षीय अंजू की मौत: मजदूर परिवार पर टूटा दुखों...

नीमराणा में 12 वर्षीय अंजू की मौत: मजदूर परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, कार्रवाई न होने से आक्रोश; मालिक पर धमकी का आरोप

नीमराणा।
अलवर जिले के नीमराणा क्षेत्र में ट्रैक्टर की टक्कर से 12 वर्षीय बच्ची अंजू की मौत के बाद पीड़ित परिवार गहरे सदमे और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। मां रेखा देवी और पिता राजकुमार का आरोप है कि हादसे के बाद से वे लगातार न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न तो ठोस कार्रवाई का भरोसा मिला है और न ही किसी तरह की राहत।

रेखा देवी पत्नी राजकुमार, मूल निवासी जरी बांदा (उत्तर प्रदेश), वर्तमान में गणपति भट्टा दोसोद, नीमराणा में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनमें अंजू तीसरे नंबर की संतान थी। मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजारा चलता था। अब मासूम बेटी की मौत के बाद घर में मातम पसरा है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि वे अभी तक इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

शिकायत के अनुसार, 21 जनवरी 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे अंजू सड़क किनारे खेल रही थी। तभी RI02GH477 नंबर का एक ट्रैक्टर तेज गति और लापरवाही से आया और बच्ची को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल अंजू को पहले बहरोड़ के अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान 1 फरवरी 2026 को डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम के बाद परिजन भाना नीमराणा थाना पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की। रेखा देवी का आरोप है कि ट्रैक्टर चालक हनुमान नामक व्यक्ति था। साथ ही उन्होंने भट्ठा मालिक पर भी दबाव और धमकी देने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि उन्हें कहा जा रहा है, “हमारे बिना तुम कुछ नहीं कर पाओगे।” इस कारण वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

पीड़ित दंपती का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं, मजदूरी ही उनका सहारा है। बेटी की मौत के बाद मानसिक आघात के साथ-साथ आर्थिक संकट भी गहरा गया है। लगातार आवेदन देने के बावजूद उन्हें कहीं से ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है—क्या इस मजदूर परिवार को समय रहते न्याय और राहत मिलेगी, या वे यूं ही दर-दर भटकते रहेंगे?

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

Recent Comments