श्योपुर/मुरैना।
भारत सरकार के उपक्रम भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के एक कर्मचारी ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है। श्योपुर में पदस्थ एटीटी रामस्वरूप पुत्र प्यारे लाल ने आरोप लगाया है कि उनके विधिवत स्वीकृत मेडिकल अवकाश को फर्जी साबित करने का प्रयास किया गया, अवकाश निरस्त करने के लिए अर्जित अवकाश (EL) देने का दबाव बनाया जा रहा है तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर जान से मारने की धमकी दी गई।
मेडिकल अवकाश पर उठे सवाल, EL देने का दबाव
प्रार्थी के अनुसार वह 25 मई 2023 से 10 दिसंबर 2023 तक अस्वस्थता के कारण मेडिकल अवकाश पर रहे। 11 दिसंबर 2023 को उन्होंने समस्त मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत कर ड्यूटी जॉइन कर ली। आरोप है कि एसडी (ओपीएन) मुरैना द्वारा जिला अस्पताल भिंड के डॉक्टरों से जारी प्रमाणपत्र को मेडिकल बोर्ड से दोबारा सत्यापित कराने के बावजूद अवकाश को ‘डाइजोन’ कर दिया गया।
कर्मचारी का कहना है कि अब उच्च अधिकारी उनसे मेडिकल अवधि समायोजन के लिए अर्जित अवकाश (EL) देने का दबाव बना रहे हैं, जबकि उन्होंने पूर्व में नियमानुसार हाफ पे लीव (HPL) प्रस्तुत की थी। उनका कहना है कि रिटायरमेंट निकट होने के कारण यदि EL समाप्त हो जाती है तो सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली राशि से वे वंचित हो जाएंगे।
जातिसूचक टिप्पणी और धमकी का आरोप
रामस्वरूप ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी ने कथित तौर पर कहा, “हम तुम्हारा मेडिकल पास नहीं करेंगे… तुम कहीं भी शिकायत कर लो… तुमको कौन पूछता है, तुम नीच जाति के हो।” कर्मचारी ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग को शिकायत भेजी है।
जर्जर एक्सचेंज में ड्यूटी, ‘मरोगे या जियोगे, वहीं रहोगे’
प्रार्थी का स्थानांतरण बड़ौदा (श्योपुर) एक्सचेंज में किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सचेंज भवन क्षतिग्रस्त है, लाइट व्यवस्था नहीं है और वर्षों से साफ-सफाई नहीं हुई। अंधेरे में सांप-बिच्छू का खतरा बना रहता है।
उन्होंने दावा किया कि डीजीएम और अन्य अधिकारियों द्वारा फोन पर धमकी दी गई कि “तुम वहाँ मरो या जिओ, वहीं रहोगे।” कर्मचारी ने आशंका जताई है कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
भिंड प्रकरण में गवाही देने पर तबादले का आरोप
रामस्वरूप ने एक अन्य मामले में भी विभागीय अधिकारियों पर साजिश का आरोप लगाया है। उनके अनुसार भिंड में कार्यरत एक लेबर कर्मचारी के वेतन भुगतान में गड़बड़ी हुई, शिकायत करने पर उसके साथ अभद्रता की गई। इस मामले में वे गवाह थे। आरोप है कि सच्चाई बताने पर उनका तबादला श्योपुर कर दिया गया और विभागीय जांच में उनके वास्तविक बयान दर्ज नहीं किए गए।
आरटीआई आवेदन भी भेजा
मामले में जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन भी किया, जिसे केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा संबंधित बीएसएनएल कार्यालय को अग्रेषित किया गया है।
उच्च स्तर पर शिकायतें प्रेषित
कर्मचारी ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, बीएसएनएल मुख्यालय नई दिल्ली, सीजीएम भोपाल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।
फिलहाल विभागीय अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। यदि प्रतिक्रिया मिलती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।r44


