Wednesday, February 11, 2026
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खेत-खलिहान से मोबाइल तक, सुरों में पहचान बना रही है पुष्पा सिंह बिना स्टूडियो, बिना प्लेटफॉर्म—इंस्टाग्राम से दुनिया तक पहुंचने का सपना

सिवान

सपने अगर सच्चे हों, तो साधन कभी रास्ता नहीं रोकते। बिहार के जिला सिवान के ग्राम खुरदरा की रहने वाली पुष्पा सिंह इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। साधारण किसान परिवार में जन्मी पुष्पा ने बचपन से ही संगीत को अपना साथी बना लिया था। स्कूल के दिनों में जब भी मंच मिलता, वह भोजपुरी और हिंदी दोनों भाषाओं में गाना गाती थीं, और उनकी आवाज़ पर तालियों की गूंज सुनाई देती थी।

स्कूल में शिक्षकों से लेकर साथी छात्र तक, सभी उनकी आवाज़ की खूब तारीफ करते थे। धीरे-धीरे गायन उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि पहचान का सपना बन गया।

किसान पिता की बेटी, संगीत से बड़ा रिश्ता

पुष्पा के पिता खेती-किसानी करते हैं। परिवार में तीन बहनें और एक भाई हैं, जिनमें पुष्पा दूसरे नंबर की बहन हैं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया।

आज पुष्पा जबलपुर में रहकर पोस्ट ऑफिस में नौकरी करती हैं। नौकरी के साथ-साथ जो थोड़ा-बहुत समय मिलता है, उसी में वह मोबाइल फोन से ही गाना रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालती हैं। न कोई स्टूडियो, न कोई म्यूजिक कंपनी और न ही कोई बड़ा मंच—फिर भी उनका हौसला कमजोर नहीं पड़ा।

इंस्टाग्राम पर पहचान, यूट्यूब से निराशा

पुष्पा इंस्टाग्राम पर “पुष्पा सिंह राजपूत” नाम से सक्रिय हैं, जहां वह अपने गाने साझा करती हैं। यूट्यूब पर भी उन्होंने चैनल शुरू किया था, लेकिन वहां अपेक्षित व्यूज़ और रिस्पॉन्स नहीं मिलने से निराश होकर उन्होंने अपनी यूट्यूब आईडी डिलीट कर दी।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि
“अगर आवाज़ सच्ची है, तो एक दिन जरूर सुनी जाएगी।”

गांव से आगे, जिले से दुनिया तक पहुंचने की चाह

पुष्पा चाहती हैं कि उनका गाना सिर्फ उनके गांव तक सीमित न रहे, बल्कि जिले, प्रदेश और देश के लोगों तक पहुंचे। वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती हैं—एक ऐसी पहचान, जो मेहनत, लगन और सुरों की ताकत से बने।

उनका कहना है,
“मैं बड़े मंच की मांग नहीं करती, बस इतना चाहती हूं कि लोग मेरा गाना सुनें। एक लाइक, एक शेयर भी मुझे आगे बढ़ने का भरोसा देता है।”

एक लाइक, एक हौसला

पुष्पा सिंह उन हजारों युवाओं की आवाज़ हैं, जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर मोबाइल के सहारे अपने सपनों को उड़ान देने की कोशिश कर रहे हैं। आज उन्हें जरूरत है सिर्फ सुनने वालों की, सराहने वालों की।

कभी-कभी एक छोटा सा प्रोत्साहन, किसी की पूरी जिंदगी की दिशा बदल देता है।

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