Thursday, February 12, 2026
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15 वर्षीय छात्रा नीलम गुड़गांव से रहस्यमय ढंग से लापता, 7 महीने बाद भी सुराग नहीं, परिजनों ने युवक पर जताया शक

गुड़गांव/मध्य प्रदेश।
गुड़गांव के सेक्टर-45 इलाके से एक नाबालिग छात्रा के लापता होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के महेवा क्षेत्र के रहने वाले अवध कुमार की 15 वर्षीय बेटी नीलम बीते सात महीनों से लापता है, लेकिन अब तक उसका कोई भी ठोस सुराग सामने नहीं आ सका है।

पीड़ित परिवार के अनुसार नीलम कक्षा 9वीं की छात्रा थी। गर्मी की छुट्टियों के दौरान वह अपने माता-पिता के साथ रोज़गार के सिलसिले में गुड़गांव आई थी। परिवार सेक्टर-45 क्षेत्र में रहकर एक कोठी में काम कर रहा था। घटना वाले दिन नीलम दोपहर करीब 2 बजे तक कोठी में काम करती रही, लेकिन इसके बाद वह अचानक लापता हो गई। देर शाम तक जब वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने आसपास तलाश शुरू की, मगर कोई जानकारी हाथ नहीं लगी।

नीलम के पिता अवध कुमार, निवासी वार्ड नंबर-18 महेवा, जिला पन्ना (मध्य प्रदेश) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी बेटी को लापता हुए पूरे सात महीने बीत चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती दिनों में यदि पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद आज उनकी बेटी का पता चल चुका होता। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही दिए गए हैं।

अवध कुमार ने इस मामले में एक युवक पर शक जाहिर किया है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश का ही रहने वाला मनोज नामक युवक घटना से ठीक दो दिन पहले गुड़गांव आया था। वह धर्म कॉलोनी क्षेत्र में रहकर दो दिन तक बेलदारी का काम करता रहा। परिजनों का आरोप है कि मनोज कुमार और उसके माता-पिता से लगातार फोन पर बातचीत होती रही, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

परिवार का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित थानों के चक्कर लगाए, लेकिन जांच की रफ्तार बेहद धीमी रही। एक नाबालिग बच्ची के लापता होने के बावजूद न तो संदिग्धों से सख्ती से पूछताछ की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।

पीड़ित पिता अवध कुमार ने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी अभी नाबालिग है और उसकी सुरक्षित बरामदगी उनकी सबसे बड़ी चिंता है। वह दिन-रात बेटी की तस्वीर लेकर दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला।

यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि आखिर नाबालिग बच्चों के लापता होने पर प्रशासन कब संवेदनशील होगा। अब पीड़ित परिवार की आखिरी उम्मीद मीडिया और उच्च अधिकारियों से है कि समय रहते नीलम को ढूंढा जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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