Wednesday, March 4, 2026
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विदेश में रहने वाला पिता बोला– बच्चे जिएं या मरें, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही 6 साल की बच्ची के ऑपरेशन के लिए मां ने लगाई मदद की गुहार

मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)।
जिले के छतवानी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां अपनी दो मासूम बेटियों के साथ पिछले चार वर्षों से संघर्ष की जिंदगी जीने को मजबूर है। पीड़िता शबाना, पति शमशाद आलम द्वारा घर से निकाले जाने के बाद अकेले ही बच्चों की परवरिश और इलाज का बोझ उठा रही है। शमशाद आलम विदेश में रहकर इलेक्ट्रीशियन का काम करता है, लेकिन दूसरी महिला के चक्कर में पड़कर उसने अपनी पहली पत्नी और दोनों बेटियों को पूरी तरह बेसहारा छोड़ दिया है।

शबाना का कहना है कि करीब चार साल पहले पति ने उसे दो बच्चियों के साथ घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद से न तो वह बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहा है और न ही किसी तरह की आर्थिक मदद कर रहा है। पति विदेश में रहते हुए दूसरी पत्नी से बातचीत करता है और पहली पत्नी व बच्चों से हर तरह का रिश्ता तोड़ चुका है।

पीड़िता की बड़ी बेटी की उम्र 8 वर्ष है, जबकि छोटी बेटी आशियानाज 6 साल की है। आशियानाज इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रही है। डॉक्टरों के अनुसार उसके किडनी में पानी भर गया है, पथरी की समस्या है और अन्य जटिल बीमारियां भी पाई गई हैं। बच्ची का इलाज चल रहा है और डॉक्टरों ने जल्द ऑपरेशन कराने की सलाह दी है, लेकिन ऑपरेशन के लिए जरूरी रकम शबाना के पास नहीं है।

शबाना ने आरोप लगाया कि जब वह इलाज के लिए पति से पैसे मांगने के लिए फोन करती है तो पति बेहद अमानवीय और दिल तोड़ने वाले शब्दों का इस्तेमाल करता है। उसने कहा कि “तुम जियो या तुम्हारे बच्चे जिएं या मर जाएं, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।” ऐसे शब्द सुनकर एक मां पूरी तरह टूट चुकी है, लेकिन फिर भी वह अपनी बच्ची की जान बचाने के लिए हार मानने को तैयार नहीं है।

इलाज के अभाव में आशियानाज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। शबाना ने मीडिया के माध्यम से आम जनता, समाजसेवियों और सक्षम लोगों से मदद की अपील की है। उसने कहा कि अगर समय रहते आर्थिक सहायता नहीं मिली तो उसकी बच्ची का ऑपरेशन संभव नहीं हो पाएगा और उसकी जान खतरे में पड़ सकती है।

शबाना ने भावुक अपील करते हुए कहा कि अब उसकी बेटी आशियानाज की जिंदगी समाज के संवेदनशील लोगों के हाथ में है। जो भी इस खबर को पढ़े, सुने या देखे, वह आगे बढ़कर मदद करे ताकि एक मासूम बच्ची की जिंदगी बचाई जा सके। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि समाज और व्यवस्था के सामने भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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