Wednesday, February 11, 2026
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बिहार में खुलेआम अपराध और भ्रष्टाचार का आरोप, ग्रामीण ने पुलिस-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लगाए गंभीर आरोप

पररी चैनपुर, बिहार।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पररी चैनपुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ग्रामीण ने स्थानीय पुलिस, पंचायत प्रतिनिधियों और राजनीतिक लोगों पर खुलेआम अपराधियों को संरक्षण देने, अवैध शराब-गांजा बिक्री, धमकी, मारपीट और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़ित मुकेश कुमार ओकारेता, निवासी ग्राम पररी चैनपुर, थाना कराना, जिला मुजफ्फरपुर ने दावा किया है कि उन्हें बिहार से बाहर भगाने की धमकी दी गई। आरोप है कि हरिंदर महतो सहित कई प्रभावशाली लोग इस पूरे नेटवर्क में शामिल हैं। पीड़ित का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जनसुराज से जुड़े विधायक उम्मीदवार, पंचायत के कुछ सदस्य और अन्य प्रभावशाली लोग अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं।

पीड़ित के अनुसार, इलाके में अवैध शराब और गांजा की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिसे थाना स्तर के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से चलाया जा रहा है। आरोप है कि जब इस संबंध में शिकायत की गई तो पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर पांच हजार रुपये की रिश्वत ली, इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
मुकेश कुमार का कहना है भोला पासवान और भोलाराम डॉक्टर संतोष कुमार हरिंदर महतो राजेश महतो अरुण महतो बिट्टू कुमार अजीत कुमार यहां के सरपंच और मुखिया यह सब शामिल है इसमें और यहां कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कर रहे गली गलौज कर रहे हैं और मुकेश को मारने की धमकी दे रहे हैं

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि 23 वर्षीय मुकेश कुमार के साथ मारपीट की घटना हुई, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का कहना है कि सत्ता और पैसे के दम पर कानून को खुलेआम चुनौती दी जा रही है।

मुकेश कुमार ने यह भी दावा किया है कि बिजली विभाग से जुड़े कुछ लोग भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और शिकायत करने पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना तक की गई। पंचायत स्तर पर बीते करीब 20 वर्षों से एक ही परिवार और उनके सहयोगियों का दबदबा होने का आरोप भी लगाया गया है।

पीड़ित ने कहा कि जब उसने इन मामलों को उठाने की कोशिश की तो उसे गाली-गलौज, धमकी और सामाजिक बहिष्कार तक का सामना करना पड़ा। उसका आरोप है कि अपराध, राजनीति और प्रशासन की मिलीभगत के कारण आम आदमी की सुनवाई नहीं हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। पीड़ित ने बिहार सरकार और उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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