Wednesday, February 11, 2026
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गरीब मजदूर की दोपहिया बाइक चोरी, थाने में आवेदन तक नहीं लिया गया: विदिशा के युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

इंदौर/विदिशा | विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश से एक सनसनीखेज और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक गरीब मजदूर की मेहनत की कमाई से खरीदी गई दोपहिया बाइक चोरी हो गई, लेकिन पीड़ित को अब तक पुलिस की मदद तक नसीब नहीं हुई है।

पीड़ित बृजेश कुमार, निवासी गांव किशनपुरा, थाना स्वरोज, जिला विदिशा हैं। बृजेश कुमार मजदूरी और बेलदारी का काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। उन्होंने बताया कि 17 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे के बीच उनकी हीरो स्प्लेंडर बाइक चोरी हो गई।
बृजेश कुमार वर्तमान में इंदौर में किराए के कमरे में रहते हैं। घटना के दिन उन्होंने अपनी बाइक रूम के सामने खाली जगह में खड़ी की थी, जहां अन्य किराएदार भी रहते हैं। जब वह लौटे तो बाइक वहां से गायब थी। आसपास काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

पीड़ित ने बताया कि चोरी हुई बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर MP09 XE 8371 है, जो मध्य प्रदेश परिवहन विभाग से पंजीकृत है। बाइक का चेसिस नंबर MBLHAW121MSF42857 है। बृजेश कुमार के पास बाइक से जुड़े सभी वैध कागजात मौजूद हैं, इसके बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पीड़ित का आरोप है कि जब वह थाने पहुंचे तो पुलिस ने आवेदन लिखने से इनकार कर दिया। कई बार चक्कर लगाने के बावजूद न तो FIR दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।
बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि यह बाइक उनके लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि रोजगार का एकमात्र सहारा है। बाइक के बिना काम पर जाना मुश्किल हो गया है, जिससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

पीड़ित ने प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल FIR दर्ज की जाए और बाइक की बरामदगी के लिए कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो चोरों के हौसले और बढ़ेंगे।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या गरीब और मजदूर वर्ग की शिकायतें सिस्टम में सचमुच सुनी जाती हैं, या उन्हें सिर्फ दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पीड़ित मजदूर को उसकी मेहनत की कमाई वापस मिल पाती है या नहीं।

 

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