85% दिव्यांग होने के बाद भी योजना में सिर्फ 50% मदद—कर्मचारी पर गंभीर आरोप**
उज्जैन/केसरिया | विशेष रिपोर्ट
ग्राम केसरिया निवासी प्रेमसिंह सोलंकी (37 वर्ष) आज भी उस दर्दनाक दिन को याद कर कांप उठते हैं। फरवरी 2022 की शाम जब अपनी बहन के घर से लौटते समय दो कुत्ते सड़क पर लड़ते हुए अचानक उनकी मोटरसाइकिल के सामने आ गए।
तेज़ झटके के साथ प्रेमसिंह जमीन पर गिर पड़े… और उनकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई।
परिवार वाले तुरंत उन्हें एसएस अस्पताल, उज्जैन ले गए। महीनों तक इलाज चला… पर उसके बाद उनकी ज़िंदगी कभी पहले जैसी नहीं रही।
पहले 40% विकलांगता थी… हादसे के बाद पूरा शरीर जवाब देने लगा
प्रेमसिंह बताते हैं कि हादसे से पहले उन्हें 40% विकलांगता की पहचान थी।
लेकिन सड़क हादसे के बाद उनका पूरा शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगा।
अब हालत ऐसी है कि—
दोनों पैरों की सिर्फ दो उंगलियां ही काम करती हैं,
बाकी उंगलियां बिल्कुल निष्क्रिय,
चलना-फिरना लगभग असंभव।
नई जांच में डॉक्टरों ने उन्हें 85% दिव्यांग घोषित किया है।
“मैं पूरी तरह लाचार हूँ… करने वाला कोई नहीं”
प्रेमसिंह का कहना है कि वह अकेले रहते हैं,
परिवार में कोई सहारा नहीं—
न कमाई का साधन, न देखभाल करने वाला कोई व्यक्ति।
उन्होंने संबल योजना के अंतर्गत आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया।
लेकिन यहीं से शुरू होती है पूरी कहानी का चौंकाने वाला मोड़।
सबल योजना के कर्मचारी पर गंभीर आरोप — “85% की जगह सिर्फ 50% भेजा गया”
प्रेमसिंह का दावा है कि संबल योजना से जुड़े कर्मचारी किशनलाल राठौड़ ने जानबूझकर उनकी फाइल में घालमेल किया।
उनके मुताबिक—
“मैं 85% विकलांग हूं, लेकिन उन्होंने एक्सीडेंट सहायता में सिर्फ 50% विकलांगता का डेटा भेजा है।
जबकि डॉक्टरों के अनुसार मेरी हालत कहीं ज्यादा गंभीर है।”
इसके कारण उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता आधी ही स्वीकृत हुई।
“मैं पूरी तरह विकलांग हूं—सरकार मदद करे, न्याय मिले”
प्रेमसिंह रोते हुए बताते हैं—
“मैं बहुत मजबूर हूं… चल नहीं सकता, काम नहीं कर सकता।
कृपया मुझे पूरी 85% विकलांगता के आधार पर सहायता दी जाए।
मैं किसी पर केस नहीं करना चाहता, सिर्फ जीने के लिए मदद चाहता हूँ।”
थाने में दी सूचना—‘मेरे साथ कोई अपराध नहीं, सिर्फ योजना का लाभ चाहिए’
प्रेमसिंह ने थाना केसरिया में स्पष्ट लिखा है कि—
हादसा किसी की टक्कर से नहीं,
सड़क पर लड़ते कुत्तों के कारण हुआ,
वह किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहते,
उन्हें सिर्फ सबल योजना के तहत पूरी सहायता मिले।
थाना ने उनकी सूचना रोजनामचा में दर्ज कर ली है।
अब सरकारी विभागों पर सवाल—क्या किसी गरीब की फाइल के साथ खेल हुआ?
सवाल यह है कि—
डॉक्टरों द्वारा 85% विकलांग घोषित किए जाने के बाद
योजना में सिर्फ 50% का आंकड़ा कैसे भेजा गया?
क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर किया गया खेल?
प्रेमसिंह की गुहार है कि मुख्यमंत्री जनसबल योजना, सामाजिक न्याय विभाग और जिला प्रशासन उनकी फाइल की जांच करे और उन्हें वास्तविक पात्रता के अनुसार सहायता राशि दिलाई जाए।
—


